वाह, क्या बात है…कराओ उठक- बैठक, पाओ प्रमोशन

पटना / अररिया (TBN रिपोर्ट) | कुछ ही दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक पुलिस होमगार्ड कुछ लोगों के सामने उठक-बैठक करता हुआ दिख रहा था. बाद में पता चला कि उठक-बैठक कराने वाले उन लोगों में बिहार सरकार के अररिया में पदस्थापित जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार थे. मनोज कुमार के साथ उस स्थल पर एक एएसआई भी मौजूद था.

दरअसल कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमण को फैलने से बचाने को लेकर लागू लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड के किसी बात पर जिला कृषि पदाधिकारी मनोज बाबू इतना गुस्सा आया कि उन्होंने होमगार्ड को उठक-बैठक लगाने की सजा दे दी.

इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार सरकार ने आनन-फानन में जांच के आदेश दे दिए. लेकिन जांच के नाम पर कुछ खास नहीं हुआ. जवान से उठक-बैठक कराने और बदसलूकी करने वाले बिहार सरकार के इस अधिकारी को बिहार सरकार ने दंडित करने के बजाय शनिवार को प्रमोशन दे दिया है.

एक पुलिसवाले के साथ गलत व्यवहार करने वाले इस अधिकारी पर कार्रवाई करने की बजाय सरकार की मेहरबानी और प्रमोशन मिलने से सवाल उठने लगे हैं. लगता है तमाम सरकारी दावों को धत्ता बताते हुए मनोज कुमार ने अपने रसूख के बल पर सब कुछ मैनेज कर लिया है

प्रमोशन letter

बताते चलें कि दो दिन पहले ही उक्त होमगार्ड के जवान को बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने फोन करके कृषि वाले मामले में व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी थी. होना तो ये चाहिए था कि जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार को पीड़ित होमगार्ड से माफी माँगनी चाहिए थी.

बाद में होमगार्ड के द्वारा जिला कृषि पदाधिकारी पर मामला दर्ज करवाया गया. जब ये मामला तूल पकड़ने लगा तो सरकार ने तत्काल प्रभाव से जिला कृषि पदाधिकारी और उसका सहयोग करने वाले एएसआई गोविंद सिंह को निलंबित कर दिया गया था.

लेकिन जिस तरह से जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार का प्रमोशन करके सीधा उपनिदेशक यानी डिप्टी डायरेक्टर बनाकर पटना स्थानांतरित कर दिया गया है, उससे लोग इस मामले की कार्यवाई को अब महज दिखावा बता रहे हैं.

दरअसल, बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी इस मामले में कृषि पदाधिकारी को दंडित करने का ऐलान किया था. उन्‍होंने 24 घंटे के अंदर कार्रवाई की बात कही थी. साथ ही, बिहार के डीजीपी भी मामले में पूरी तरह हमलावर थे. राज्य सरकार ने भी स्पष्टीकरण दिया. लेकिन मामले के पाँच दिनों के अंदर ही कृषि पदाधिकारी को प्रमोशन देकर राज्य सरकार ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है. और जो हुआ वो सबके सामने है.