गन्ना किसानों की परेशानी पर एक्साइज विभाग की शुगर मिल प्रबंधन के साथ बैठक

बगहा (TBN रिपोर्ट) | बिहार में राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद भी तिरुपति शुगर मिल प्रबंधन द्वारा मोलाइसिस छोवा की बिक्री नहीं किए जाने की शिकायत पर बुधवार को एक्साइज विभाग के डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार दल बल के साथ बगहा पहुंचे और तिरुपति चीनी मिल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ आवश्यक समीक्षा बैठक की.

डिप्टी कमिश्नर एक्साइज ने सख्त निर्देश दिया कि सरकार के आदेश का पालन किया जाए और मोलाइसिस की सप्लाई डिस्टलरी को सुनिश्चित कराई जाए.

दरअसल 15 दिनों से मोलेसिस उठाव के लिए तिरुपति शुगर्स मिल्स के सामने गाड़ियां खड़ी हैं और मिल प्रबंधन सरकार द्वारा वर्ष 2014 में निर्धारित किए गए मोलाइसिस के मूल्य को बाजार रेट से कम होने की बात कह कर इसका सप्लाई देने में आनाकानी कर रहा है.

मिल प्रबंधन मोलाइसिस एस के गुप्ता का कहना है कि सरकार द्वारा मोलाइसिस बिक्री के लिए वर्ष 2014 में सरकारी दर ₹287.50 पैसे निर्धारित किया गया है जबकि खुले बाजार में ₹ 607.50 का दर मिल रहा है ऐसे में नुकसान सहकर बेचना कहां तक उचित है.

उत्पाद विभाग से किसानों के एक शिष्ट मंडल ने भी मुलाकात कर अपना दुखड़ा सुनाया और किसानों ने कहा कि सरकार और चीनी मिल प्रबंधन के आपसी पेंच के बीच किसान पीस रहे हैं और उन्हें मोलाइसिस नही बिकने की बात कह उनका भुगतान बाधित किया जा रहा है.

हालांकि उत्पाद विभाग के डिप्टी कमिश्नर ने कहा है कि किसान और मिल प्रबंधन की शिकायतें सुनी जाएंगी और मिल प्रबंधन को इसके लिए राज्य सरकार से बात करनी चाहिए ना कि सरकार के आदेश की अवहेलना करनी चाहिए. कमिश्नर ने मिल प्रबंधन को निर्देशित किया कि सरकार द्वारा निर्धारित दर पर अविलम्ब मोलासिस सप्लाई किया जाए अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

बता दें कि बिहार में कुल 11 चीनी मिलों में रीगा चीनी मिल बन्दी के कगार पर है. इसके पूर्व कई चीनी मिलों को शट-डाउन करना पड़ा है. कृषि प्रधान चंपारण में एक मात्र नगदी फसल गन्ना है जहां गन्ना किसानों की चिंता खेती किसानी को लेकर लंबित भुगतान और लॉक डाउन में दुगुनी बढ़ गई है तो वहीं तिरुपति चीनी मिल प्रबन्धन करीब 85 करोड़ के बकाया भुगतान चीनी की बिक्री और दर समेत मोलाइसिस सप्लाई और दर नहीं बढ़ाने को लेकर घाटे का हवाला देकर कर्मियों के वेतन भुगतान में भी परेशान है.

ऐसे में सरकार को चाहिए कि समय रहते दर निर्धारण कर बढ़ती मंहगाई और लॉक डाउन में चीनी मिलों के साथ साथ किसानों का हित कर बीच का रास्ता निकाले ताकि बन्दी के कगार पर पहुंचने से चीनी मिलों को बचाया जा सके और खेती किसानी के साथ साथ किसानों के दिन बहुरंगे हो सके.