कोरोना के साथ-साथ स्‍वाइन फ्लू से लोगों में द’हशत

भागलपुर (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट)| चीन में कोरोना वायरस को’हराम मचाने के बाद भारत में भी दस्तक दे चुका है. बिहार में कोरोना वायरस के 5 और संदिग्धों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनमें दो पटना तथा बाकी तीन गोपालगंज, दरभंगा व नालंदा निवासी हैं.  इसी बीच भागलपुर जिले के वार्ड नंबर 26 में अत्यधिक संख्या में सूअरों के मरने से लोगों के ऊपर स्वाइन फ्लू के डर का साया मंडरा रहा है. कोरोना की दहशत के बीच स्वाइन फ्लू की ख़बरों ने स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है.

मिली जानकारी के अनुसार भागलपुर जिले के वार्ड नंबर 26 में पिछले दो दिनों के दौरान 78 सुअरों की मौत के कारण लोगों को स्‍वाइन फ्लू का खतरा सता रहा है. स्थानीय लोगों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है. सूअरों की मौत का कारण स्वाइन फ्लू ही है या कुछ और है इसकी आधिकारिक पुष्टि मृत सुअरों के विसरा जांच के बाद ही हो पायेगी. स्वाइन फ्लू वायरस एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी के कारण बनता है जो खेतों में रहने वाले सूअरों को प्रभावित करता है और इसका मुकाबला करने के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है. यही वजह है कि बड़े पैमाने पर सूअरों को मारना ही इसे फैलने से रोकने का एकमात्र विकल्प है.

घटना की सूचना मिलने के बाद जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. शंभुनाथ झा ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि उनको 35 सुअरों के मरने की सूचना मिली है. जिनके मरने का कारण स्वाइन फीवर बताया गया है. फ़िलहाल इस बात की आधकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती की मौत की असली वजह क्या है. मौत के कारणों का खुलासा तो बिसरा जांच की रिपोर्ट आने पर ही हो पायेगा.

भागलपुर वार्ड 26 और आसपास के क्षेत्रों में अब तक 90 सुअरों की मौत हो चुकी है. सूअरों की इतनी अधिक संख्या में मौत के संबंध में जानकारी देते हुए वार्ड पार्षद प्रीति शेखर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर सूचित किया है. पशुपालन विभाग की टीम के द्वारा प्रभावित वार्ड का दौरा किया गया है. फिलहाल ये तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा की इतने बड़े पैमाने पर हुई सूअरों की मौत का कारण स्वाइन फ्लू ही है या फिर कोई और बीमारी है.