नहीं होगा बिजली का निजीकरण बिहार में

 

पटना (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट) | सरकारी विभाग के बिजली कर्मचारियों,अधिकारियों और इंजिनियर्स के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. मिली जानकारी के अनुसार अब बिहार में बिजली का निजीकरण नहीं होगा. ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बिजली का निजीकरण न करने के सम्बन्ध में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तर्क प्रस्तुत किये थे. बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह को लिखे गए पत्र में  कहा है कि “देश में प्रयोग के तौर पर निजी कंपनियों को बिजली आपूर्ति करने का जिम्मा दिया जा रहा था तो बिहार में भी गया, मुजफ्फरपुर व भागलपुर में भी इस पर काम हुआ. साल 2013 में तीनों शहरों में बिजली आपूर्ति का जिम्मा निजी एजेंसियों को दे दिया गया. लेकिन बिहार में यह प्रयोग पूरी तरह असफल रहा. तीनों शहरों में बिजली आपूर्ति बद से बदतर हो गई. किसी तरह की नई विद्युत संरचना का निर्माण भी निजी कंपनियों ने नहीं किया. बाध्य होकर निजी कंपनियों के एकरारनामे को रद्द करना पड़ा. इससे साफ है कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में सरकारी कंपनियों की ओर से किए जा रहे कार्य सराहनीय, असाधारण व उत्साहवर्धक साबित हो रहे हैं तो निजी क्षेत्र के प्रयोग असफल रहे हैं. इसलिए निजीकरण के बजाए देश के दूसरे राज्य बिहार की बिजली कंपनी का अनुसरण करें. पहले भी बिहार ने साफ कर दिया था कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण पर सरकार सहमत नहीं हैं”.

ऊर्जा मंत्री के द्वारा दिए गए तर्क के अनुसार “बिहार में 95 फीसदी उपभोक्ता गैर औद्योगिक श्रेणी के हैं. उद्योग से अधिक कृषि क्षेत्र के कनेक्शन हैं. ऐसे में बिहार ने बिजली कर्मियों व इंजीनियरों का सहयोग लेकर बिजली नुकसान कम कर असाधारण काम किया है. बिहार में 2012 में बिजली बोर्ड से होल्डिंग, ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बनी. सुशासन के कार्यक्रम के तहत 2015-20 में सीएम विद्युत संबंध निश्चय योजना के हत हर घर तक बिजली पहुंचाने का निर्णय लिया गया. मार्च 2016 से शुरू इस योजना से प्रभावित होकर केंद्र सरकार ने पूरे देश में  सौभाग्य योजना नाम से इसे लांच किया. बिहार ने दिसम्बर 2018 के लक्ष्य से पहले अक्टूबर 2018 में ही इसे पूरा कर लिया. 2017-18 में बिहार ने शून्य आधारित टैरिफ विनियामक आयोग के समक्ष दायर कर नई शुरुआत की. आज देश के दूसरे राज्य इसका अनुसरण कर रहे हैं. संचरण-वितरण नुकसान को कम करने के लिए स्पॉट बिलिंग की शुरुआत हई. प्री-पेड मीटर पर काम चल रहा है. मीटर उत्पादकों की संख्या कम होने के कारण इसे लगाने में परेशानी हो रही है. स्मार्ट मीटर की उपलब्धता हो तो लक्ष्य से पहले यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा”.

पिछले दिनों पटना में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों,अधिकारियों और इंजिनियर्स ने विरोध प्रदर्शन किये थे. हंगामा रोकने लिए पुलिस ने प्रदर्शकारियों पर जमकर लाठीचार्ज किया था लेकिन सरकारी बिजली विभाग के कर्मचारी बिजली का निजीकरण ना किए जाने की मांग को लेकर अड़े रहे थे.