चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर निकाय चुनाव को अगले आदेश तक टाला

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| मंगलवार को पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने नीतीश सरकार (Nitish Government) को तगड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने नगर निकाय चुनाव (Bihar municipal elections 2022) पर अपना फैसला सुनाते हुए पिछड़ा -अति पिछड़ा वर्ग के लिए रिजर्व सीटों के चुनाव पर रोक लगा दी है. इसी के मद्देनजर, बिहार चुनाव कमिशन ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए नगर निकाय चुनाव के पहले और दूसरे चरण के मतदान को अगले आदेश तक टाल दिया है.

हाईकोर्ट ने बिहार के स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्गों (Other Backward Classes) को आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर यह निर्णय सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रावधानों के अनुसार तब तक स्थानीय निकायों में ओबीसी (OBC) के लिए आरक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) द्वारा निर्धारित तीन जांच अर्हताएं नहीं पूरी कर लेती.

इधर, नगर निकाय चुनाव में OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Deputy Chief Minister Tejashwi Yadav) कहा, “भाजपा (BJP) के पास ये विभाग रहा है और शुरू से ही भाजपा आरक्षण विरोधी लोग रहे हैं. हमारी कामना ये है कि बिना आरक्षण के चुनाव ना कराएं. पिछड़ा समाज के आरक्षण के साथ ही चुनाव होना चाहिए.”

बिहार नगर निकाय चुनाव 2022 (Bihar Nagar Nikay Chunav 2022) को लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल (Chief Justice Sanjay Karol) और न्यायाधीश एस कुमार (Judge S Kumar) की खंडपीठ ने 86 पन्नों का निर्णय को देते हुए कहा कि “चुनाव आयोग को एक स्वायत्त और स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करना होता है, न की बिहार सरकार के हुक्म से बंध कर (The Election Commission shall review its functioning as an autonomous and independent body, not bound by the dictates of the Government of Bihar).”

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कोर्ट की ओर से यह कहा गया है कि राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य घोषित कर चुनावी प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकता है. इस फैसले के साथ ही 10 और 20 अक्टूबर को होने वाली नगरपालिका चुनाव पर फिलहाल रोक लग गई है.

ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अनिवार्य

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा कि जब तक राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर लेती तब तक अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य माना जाएगा. अति पिछ़ड़ों को आरक्षण देने से पहले हर हाल मे ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया (triple test procedure) अनिवार्य है.

कोर्ट ने यह भी कहा है राज्य निर्वाचन आयोग या तो अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य करार देकर चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाए या फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट करा कर नए सिरे से आरक्षण का प्रावधान बनाए.

बता दें कि स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में फैसला सुनाया था. उस फैसेल के अनुसार स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती है जब तक कि सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा निर्धारित तीन जांच की अर्हता पूरी नहीं कर लेती. सुनील कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. इसी मामले में सुनवाई चल रही थी. पटना हाई कोर्ट ने इस मामले पर 29 अक्टूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज मंगलवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.

सुशील मोदी का नीतीश पर प्रहार

नगर निकाय चुनावों के ऊपर पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार पर जबरदस्त प्रहार किया है. मोदी ने कहा कि अति पिछड़ों को नगर निकाय चुनाव में आरक्षण से वंचित करने के लिए नीतीश कुमार ज़िम्मेवार हैं.

उन्होंने कहा कि मैंने 3 बार बयान देकर सरकार को चेतावनी दी थी कि बिना ट्रिपल टेस्ट के चुनाव मत कराइए. परंतु नीतीश कुमार किसी की सुनने को तैयार नहीं थे. आज जो फ़ज़ीहत हुई है उसके लिए केवल नीतीश ज़िम्मेवार हैं.

सहूसिल मोदी ने आगे कहा कि AG और राज्य निर्वाचन आयोग बार बार ट्रिपल टेस्ट की बात कर रहे थे. परंतु CM की ज़िद के कारण AG को CM के मनोनुकूल opinion देना पड़ा. लोगों का करोड़ों खर्च हो चुका.

उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का नगर निकाय चुनाव से कोई सम्बन्ध नहीं है. कोर्ट का कहना था कि एक dedicated commission बना कर उसकी अनुशंसा पर आरक्षण दें. परंतु नीतीश कुमार अपनी जिद पर अड़े थे. AG और SEC की राय भी नहीं मानी.

(इनपुट-न्यूज)