68 साल बाद एअर इंडिया का मालिकाना हक फिर से टाटा ग्रुप के पास

नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)| घाटे से जूझ रही सरकारी कंपनी एअर इंडिया आखिरकार बिक गई. एअर इंडिया को 3 साल से बेचने की कोशिश कर रही मोदी सरकार को शुक्रवार सफलता मिल गई. सरकार ने 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए टेंडर मांगे थे. कंपनी को खरीदने के लिए टाटा ग्रुप और स्पाइस जेट एयरलाइंस ने बोली लगाई थी. सरकार ने टाटा ग्रुप के टेंडर को मंजूरी दे दी.

बता दें, जवाहर लाल नेहरू सरकार ने 1953 में एअर इंडिया का अधिग्रहण किया था. 68 साल बाद एक बार फिर से एअर इंडिया का मालिकाना हक टाटा समूह के पास आ गया है.

शुक्रवार को टाटा संस द्वारा एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए बोली जीतने के बाद, समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने कंपनी के पूर्व अध्यक्ष जेआरडी टाटा की एयर इंडिया की उड़ान से नीचे उतरने की एक पुरानी तस्वीर ट्वीट की.

एक प्रेस वक्तव्य में रतन टाटा ने कहा, “एयर इंडिया के लिए बोली जीतना टाटा समूह की अच्छी खबर है. टाटा समूह एयर इंडिया के पुनर्निर्माण के लिए काफी प्रयास करेगा. उम्मीद है कि यह विमानन उद्योग में टाटा समूह की उपस्थिति के लिए एक बहुत मजबूत बाजार अवसर प्रदान करेगा.”

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उन्होंने कहा कि एक समय जेआरडी टाटा के नेतृत्व में एयर इंडिया दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइनों में से एक होने की प्रतिष्ठा प्राप्त की थी. टाटा के पास पहले के वर्षों में मिली छवि और प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करने का अवसर होगा. जेआरडी टाटा अगर आज हमारे बीच होते तो बहुत खुश होते. हमें निजी क्षेत्र के लिए चुनिंदा उद्योगों को खोलने की हाल की नीति के लिए सरकार को पहचानने और धन्यवाद देने की भी जरूरत है. वेलकम बैक एयर इंडिया.

एअर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का मर्जर

केंद्र सरकार ने 2007 में फ्यूल की बढ़ती कीमत, प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों से मिलते कॉम्पिटिशन को वजह बताते हुए एअर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का मर्जर कर दिया था. वैसे, 2000 से लेकर 2006 तक एअर इंडिया मुनाफा कमा रही थी, लेकिन मर्जर के बाद कंपनी की आय कम होती गई और कर्ज लगातार बढ़ता गया. कंपनी के ऊपर 31 मार्च 2019 तक 60 हजार करोड़ से भी ज्यादा का कर्ज हो गया था. वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अनुमान लगाया था कि एयरलाइन को 9 हजार करोड़ का घाटा हो सकता है.

केंद्र की UPA सरकार ने बेलआउट पैकेज से कंपनी को उबारने की कोशिश भी की थी, लेकिन नाकाम रही. इसके बाद 2017 में इसके विनिवेश की रूपरेखा बनाई गई.

2018 में सरकार ने फैसला किया कि वह एअर इंडिया में अपनी 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. इसके लिए कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) मंगवाए गए, लेकिन सरकार के पास एक भी कंपनी ने EOI सबमिट नहीं किया.

कोरोना ने रोका था रास्ता

फिर जनवरी 2020 में 76 फीसदी की जगह 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लेते हुए विनिवेश के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई. कंपनियों से 17 मार्च 2020 तक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाया गया लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने इसे रोक दिया. आखिरकार 15 सितंबर 2021 आखिरी तारीख निर्धारित की गई जिसमें टाटा और स्पाइसजेट ने एअर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगाई.

टाटा ग्रुप द्वारा ज्यादा बोली लगाने के बाद करीब 68 साल बाद एअर इंडिया घर वापसी कर गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल और एविएशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की कमेटी ने इस डील पर मुहर लगाई. सूत्रों के मुताबिक, एअर इंडिया का रिजर्व प्राइस 15 से 20 हजार करोड़ रुपए तय किया गया था.