अभिनेत्री निकिता घाग को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार

मुंबई (TBN – संगीता गुप्ता की रिपोर्ट)| चाहे आप भारत में बाघों को, अफ्रीका में हाथियों को, कैलिफोर्निया में शार्क को, जापान में व्हेल को या अपनी गलियों में कुत्तों और बिल्लियों को बचाना चाहते हों, DAWA की निकिता घाग एक ऐसी महिला हैं जो उनके लिए हमेशा खड़ी होती हैं. अभिनेत्री निकिता घाग (Actress Nikita Ghag) पशु अधिकारों के लिए एक स्पष्टवादी वकील हैं और इस बात के लिए लोगो को जागरूक कर रही हैं कि जानवरों को नुकसान पहुँचाए बिना फैशन-फ़ॉरवर्ड होना कैसे संभव है.

निकिता घाग क्रूरता मुक्त जीवन जीने में विश्वास रखती हैं और उसी पर जागरूकता फैलाने पर यकीन रखती हैं. उनकी सक्रियता और पालतू जानवरों को गोद लेने की उनकी वकालत के अलावा उनकी “किल द फियर – लेट एनिमल्स नियर” (Kill the Fear – Let Animals Near) पहल के साथ स्कूली बच्चों को जानवरों को गोद लेने के लिए संवेदनशील बनाने के लिए, घाग को प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया (Nikita Ghag conferred with prestigious Dadasaheb Phalke Award) है.

निकिता कहती हैं कि “पशु सुरक्षा सीधे मानव स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करती है. महामारी वह समय है जब हमें यह समझने के लिए फिर से जीने की जरूरत है कि जानवरों को कैसा महसूस होता है जब उन्हें चिड़ियाघरों में बंद कर दिया जाता है या जंजीरों में बांध दिया जाता है. पालतू जानवरों को बचाना और गोद लेना हमारे जीवन में कुछ अतिरिक्त विशेष पल लाता है क्योंकि किसी को बचाना सबसे बड़ी मानवता हैं.”

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पशु अधिकारों के हक में बेबाकी से आवाज उठानेवाली और उनके समर्थन में लड़नेवाली निकिता घाग ने राजनेताओं से लाखों जानवरों की स्थिति में सुधार के लिए कानून पारित करने की अपील की है. “मैं मांस नहीं खाती क्योंकि यह अस्वस्थ है मैं मांस नहीं खाती क्योंकि आपकी थाली में जो कुछ है वह एक हिंसक और अमानवीयता की निशानी है.”

घाग का मानना है कि उनका काम अभी शुरू हुआ है. “हम अभी भी मानवता और जानवरों की दुनिया के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाने से बहुत दूर हैं. हम मनुष्यों को यह समझना चाहिए कि हमारा भविष्य पूरी तरह से जैव विविधता की रक्षा, वनों और महासागरों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर टिका है – पृथ्वी के संबंध में. यह समय है कि हम यह देखने के लिए अपनी समझ को बदलें कि दुनिया वास्तव में कहाँ जा रही है.”

समय की क्या जरूरत है? जब हम दूसरी तरफ देखते हैं, तो हम अपनी आत्मा पर लगने वाले घावों की तुलना में सामाजिक दंड छोटे होते हैं, ”निकिता,मार्टिन लूथर किंग के कहे हुए बता को बताती हैं. “जानवरों को जीवित प्राणी समझो. वही तो हैं. अगर हम गोद नहीं ले सकते या बचाव नहीं कर सकते, तो कम से कम अपने छोटे से तरीके से क्रूरता को रोकें. यह हमारे अपने बच्चों के लिए पृथ्वी को बचाने की दिशा में एक कदम है.”