छोटे सरकार की सदस्यता रद्द, क्या लालू की तरह पत्नी के सहारे राजनीति !

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| राष्ट्रीय जनता दल के नेता अनंत सिंह (Rashtriya Janata Dal leader Anant Singh) को एके-47 बरामदगी मामले (AK-47 recovery case) में दोषी ठहराए जाने के बाद बिहार विधानसभा ने गुरुवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य विधानसभा के सदस्य के रूप में उनकी सदस्यता रद्द कर दी.

बता दें, उन्हें 2019 में बिहार में उनके आवास से एक एके -47 राइफल, दो हथगोले और 26 जिंदा कारतूस की बरामदगी से संबंधित एक मामले में दोषी ठहराया गया था. उनके खिलाफ नई संशोधित गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) [Unlawful Activities (Prevention) Act] के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एमपी-एमएलए अदालत ने पिछले महीने उन्हें अपराध का दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई.

गुरुवार को जारी अधिसूचना में, अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने का प्राथमिक कारण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (ई) के प्रावधान है. इसके अंतर्गत ऐसे व्यक्ति को सजा की तारीख से संसद या राज्य के विधानमंडल के सदस्य से अयोग्य ठहराया जाता है. इस मामले में मोकामा से पांच बार लगातार चुनाव जीतने वाले विधायक अनंत सिंह ने 23 अगस्त, 2019 को नई दिल्ली में साकेत अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.

राजनीति खत्म या यह करेंगे छोटे सरकार

सवाल यह उठता है कि क्या विधायकी जाने के बाद छोटे सरकार की राजनीति खत्म हो जाएगी और वे राजनीति मे बीती बात हो जाएंगे ? या फिर वे उस राजनीति का सहारा लेंगे जो अबतक बिहार और दूसरे प्रदेश के नेता लेते रहें हैं.

यानि, क्या अनंत सिंह उन नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे जिसमें लालू प्रसाद और राजवल्लव यादव है ? बता दें, लालू प्रसाद और राजवल्लव यादव सजायाफ्ता होने के बाद अपनी पत्नियों के सहारे राजनीति कर रहे हैं. वैसे सदन की सदस्यता गंवा कर चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित होने के बाद पत्नी के सहारे राजनीति करने वाले नेताओं की सूची लंबी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अनंत सिंह अपनी पत्नी नीलम सिंह के माध्यम से राजनीति में रह सकते हैं. अनंत सिंह अपनी पत्नी नीलम सिंह को उपचुनाव में उम्मीदवार बना सकते हैं.

बताते चलें, अनंत की पत्नी नीलम सिंह पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव में मुंगेर से महागठबंधन उम्मीदवार के रूप में मजबूती से चुनाव लड़ा था. वैसे तो इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन ललन सिंह जैसे पुराने नेता को उन्होंने जोरदार टक्कर दी थी.