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I.N.D.I. गठबंधन का कैसा होगा “द एण्ड” ?

पटना (TBN – वरिष्ठ पत्रकार अनुभव सिन्हा की खास रिपोर्ट)| तीन मुलाकातों के बाद इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन की चौथी मुलाकात जब भी होगी, उसके पहले उसका कुनबा ज्यादा शिद्दत से कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के साथ पेश आयेगा, इसकी पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है. 162 लोकसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी जैसे तीन राज्यों में कांग्रेस की चतुराई की हवा निकल गई है.

ममता बनर्जी की राजनीति का मुकाबला करने में कांग्रेस अपने हितों की बली नहीं चढा़येगी, यह लगभग स्पष्ट हो चुका है. लेकिन तब पश्चिम बंगाल में रणनीति कैसे तैयार होगी, इसपर अब दिसम्बर में विचार होगा.

लालू-नीतीश के अपने-अपने हित

पश्चिम बंगाल के बाद बिहार में इंडी गठबंधन की स्थिति खास तरीके से ज्यादा बदहाल है. बिहार के दो बडे़ खिलाड़ी लालू-नीतीश के अपने-अपने हित हैं और दोनो समझौते के मूड में नहीं हैं. मोतीहारी में बीते गुरुवार को भाजपा के साथ जन्म-जन्मांतर का संबंध बताने वाले नीतीश कुमार ने दरअसल लालू यादव और राहुल गांधी को ही हड़काया है. लालू की दिक्कत यह है कि किसी भी कीमत पर कांग्रेस का साथ छोड़ नहीं सकते, भले नीतीश कुमार का साथ छूट जाय. इसका संकेत नीतीश कुमार और कांग्रेस की सीटों की संख्या से मिलता है. नीतीश कुमार को 16 सीटें चाहिए और कांग्रेस 10 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है. तब बाकी बचे 14 सीटों के बाबत लालू क्या नहायेंगे और क्या निचोडे़ंगे ? जबकि लालू की अपनी दरकार ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की है. दिल्ली में कांग्रेस का साथ होने के लिए लालू का बिहार में मजबूत होना जरुरी है. उधर नीतीश कुमार ने भी साफ कर दिया है कि एक हद से आगे लालू का लोड लेना कतई जरुरी नहीं है.

अखिलेश ने कांग्रेस को बताया धोखेबाज

सबसे ज्यादा सीटों वाले यूपी में इंडी गठबंधन का तो ‘द एण्ड’ ही हो गया है. आगबबूला सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस पार्टी को धोखेबाज बताते हुए एलान कर दिया है कि वह अपने अपमान का बदला कांग्रेस पार्टी से लेंगे. सपा-कांग्रेस की बात बिगडी़ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे पर. कांग्रेस पार्टी ने अखिलेश यादव को बताया कि इंडी अलायंस राज्य स्तरीय चुनावों के लिए नहीं बल्कि आम लोकसभा चुनावों के लिए है. जबकि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने अखिलेश यादव को मप विधानसभा चुनावों में 6 सीटें देने का वादा किया था और इस बाबत बातों का सिलसिला देर रात तक कई दिन चला. लेकिन अंत में कांग्रेस पार्टी ने अखिलेश यादव को एक भी सीट देने से इंकार कर दिया. अब मप विधानसभा की नजर आने वाली चुनावी तस्वीर में इंडी अलायंस के कांग्रेस-आप-सपा एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोकेंगे.

7 नवम्बर से शुरु होकर 30 नवंबर तक चार चरणों में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव करा लिए जायेंगे. कांग्रेस पार्टी को छग, मप और राजस्थान में 2018 को दोहराए जाने की उम्मीद है. 2018 में तीनों राज्यों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. खासकर इन तीन राज्यों के चुनाव परिणाम आ जाने के बाद ही कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनावों की रणनीति और सीटों के बंटवारे पर इंडी अलायंस से बात करेगी. पर संकेत यही हैं कि तीन राज्यों के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए जैसे भी हों, हार या जीत दोनो ही स्थिति में क्षेत्रीय दलों से उसका मनमुटाव और तीखा ही होगा.