URDA ने CM को पत्र लिखकर दी चेतावनी

पटना (TBN रिपोर्ट) :- बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेसिडेंट डॉक्टर, पोस्ट ग्रैजुएट ट्रेनी और इंटर डॉक्टरों के स्टाइपेंड (वज़ीफ़ा) में बढ़ोतरी को लेकर यूनाइटेड रेसिडेंट एंड डॉक्टर्स एसोसिएशन इंडिया (URDA) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार को चेतावनी भरा पत्र लिखा है.

बिहार यूआरडीए के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि एसोसिएशन ये जानता है कि इस समय पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, जिसके कारण सब कुछ थम गया है. लेकिन हम उन युवा डॉक्टरों के मुद्दे को उठा रहे हैं जो कोरोना योद्धा है और बिना भय के कोविड-19 से लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा इस सच्चाई से हर कोई अवगत है कि करोना जैसे वैश्विक महामारी से देश के नागरिकों को बचाने के लिए चिकित्सा व स्वास्थ्यकर्मी अग्रिम पंक्ति में हैं.

डॉ. विनय ने कहा है कि बेहद दुख के साथ ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं कि बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सीनियर रेसीडेंट, पोस्ट ग्रैजुएट ट्रेनी और इंटर डॉक्टर अपने स्टाइपेंड (वज़ीफ़ा) में बढ़ोतरी के लिए लगातार आग्रह कर रहे हैं, जो बीते 5 वर्षों से लंबित है जबकि बिहार सरकार का आदेश है कि ये प्रत्येक 3 वर्ष में बढ़ाया जाएगा.

यूआरडीए अध्यक्ष ने कहा है कि कई बार इस मामले को उच्च अधिकारियों के सामने रखे जाने के बावजूद ऐसा लगता है कि बिहार सरकार को डॉक्टरों की कोई चिंता नहीं है. सरकार केवल काम लेना चाहती है लेकिन उसके बराबर मेहनताना देना नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से बिहार एक ऐसा राज्य है जहां दूसरे राज्यों की तुलना में डॉक्टरों पर अधिक संख्या में नागरिकों का बोझ है.

डॉ विनय ने कहा है कि यह एक बेहद वास्तविक मुद्दा है, क्योंकि डॉक्टर अपने देश और नागरिकों की सेवा कर रहे हैं. लिहाज़ा स्टाइपेंड और सुविधाओं में बढ़ोतरी से इन युवा कोरोना योद्धाओं (डॉक्टरों) का मनोबल बढ़ेगा.

पत्र के अंत में एसोसिएशन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यूआरडीए आग्रह करता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेसिडेंट डॉक्टरों का हौसला टूटने से पहले न्याय किया जाए ताकि जनसेवा बेहतर तरीके से चल सके. अगर मांगे नहीं मानी गई तो एसोसिएशन सख्त कदम उठाने पर बाध्य होगा.