उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी के नेतृत्व को नकारा, महागठबंधन से तोड़ सकते हैं नाता

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | बिहार चुनाव की घोषणा से पहले एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. रालोसपा ने अपने अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा को महागठबंधन में रहने या नहीं रहने को लेकर अधिकृत कर दिया है. साथ ही उपेन्द्र ने तेजस्वी के नेतृत्व को नकार दिया है.

गुरुवार को रालोसपा के जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय कमिटिकी हाई लेबल मीटिंग हुई. इस मीटिंग में सबों ने उपेन्द्र कुशवाहा को इस बात के लिए अधिकृत कर दिया कि वे किसके साथ जाएंगे – एनडीए या महागठबंधन के साथ.

गौरतलब है कि उपेन्द्र कुशवाहा महागठबंधन में रहने को लेकर पशोपेश में हैं. महागठबंधन द्वारा भाव नहीं देने से उपेन्द्र स्पष्ट निर्णय नहीं ले पा रहे हैं. इसके साथ वे वापस एनडीए में लौटने के संकेत भी दे रहे हैं. उन्होंने कहा है कि वे राज्य की जनता और अपने कार्यकर्ताओं के हित का ख्याल करते हुए सोच समझकर निर्णय लेंगे.

सीट की मांग खारिज होने से मोह भंग

बताया जा रहा है कि उपेन्द्र कुशवाहा ने महागठबंधन में अपने पार्टी के लिए चुनाव में 35 से 40 सीट की मांग की थी. इस मांग को आरजेडी विधायक तेजस्वी यादव ने खरीज कर दिया है. इस कारण उनका तेजस्वी से मोह भंग होना बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राजद के व्यवहार के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि अब निर्णय लेने का समय आ गया है.

कुशवाहा के रहने, रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता

इधर उपेन्द्र कुशवाहा द्वारा महागठबंधन से नाता तोड़ने के कयासों पर आरजेडी के एक नेता ने टिप्पणी की है. नाम नहीं छापने की शर्त पर आरजेडी के एक बड़े नेता ने कहा है कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में कुशवाहा तो अपना वोट टर्न नहीं करवा पाए थे. साथ ही खुद वो दो जगहों से खड़ा हुए थे और दोनों जगहों से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. इतना ही नहीं, कुशवाहा ने उस वक्त बाकी सीटों को बेच दिया था. इसलिए उनके महागठबंधन में रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है.

यही बात आरजेडी उस बड़े नेता ने VIP के मुकेश सहनी के बारे में कहा. उन्होंने कहा कि VIP का जो भी वोट बैंक है वो बीजेपी का है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में इसका पता चल गया है. इसलिए आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी सिर्फ कॉंग्रेस और लेफ्ट के साथ गठबंधन चाहता है. इस स्थिति में हमारे महागठबंधन में हमारी शर्तों पर जिसे आना होगा वो आएगा. तेजस्वी यादव के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए हमारा उम्मीदवार तेजस्वी ही हैं और इसपर कोई समझौता स्वीकार नहीं है.

एक बात तो तय है कि हर बार की भांति इस बार भी चुनाव से पहले बिहार में सीट बंटवारे पर एनडीए और महागठबंधन दोनों में फिलहाल मामला फंसा हुआ लगा रहा है. वैसे एनडीए में इस मैटर पर कोई भी सहयोगी दल अलग नहीं हुआ है और न ही इसकी संभावना दिख रही है. लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर पहले ही जीतन राम मांझी महागठबंधन से नाता तोड़ कर एनडीए के साथ हो लिए हैं. अब लगता है कि उपेन्द्र भी उसी राह को पकड़ने वाले हैं. लेकिन महागठबंधन छोड़ने से पहले वे आरजेडी को एक मौका देने की रणनीति बनाई है.