नॉमिनेशन के पूर्व ही राजद के गुब्बारे में दो बड़े छेद

पटना (अनुभव सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार की खास रिपोर्ट) | जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती जा रही है वैसे वैसे मुख्य विपक्षी दल राजद के गुब्बारे का छेद भी बढ़ता जा रहा है. अभी तक इस गुब्बारे में दो बड़े छेद हो चुके हैं तथा यह स्थिति चुनाव पूर्व की है.

कई दलों से मिलकर बना यह महागठबंधन अब पांच दलों में सिमट कर रह गया है. राजद के अलावा कांग्रेस और वाम दलों में भाकपा-माले राजद के लिए ऐसेट बन सकते हैं, लेकिन भाकपा-माकपा-कांग्रेस तीनों दल राजद के भरोसे ही है यानी राजद की लायबिलिटी भी हैं.

यह स्थिति तब बनी, जब उपेंद्र कुशवाहा तथा जीतन राम मांझी के महागठबंधन से अलग हो जाने के बाद अब एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी के सर्वे सर्वा मुकेश सहनी ने भी राजद से अपना पल्ला झाड़ लिया. राजद के डीएनए को गड़बड़ बताकर सहनी ने राजद के गुब्बारे में पहला छेद किया तो हत्या के एक मामले में राजद के शीर्ष नेतृत्व को नामजद अभियुक्त बनाया गया जो गुब्बारे का दूसरा बड़ा छेद है.

यह दोनों घटनाएं चुनाव प्रक्रिया के दौरान की हैं. लालू प्रसाद यादव को 27 वर्षों की सजा हुई है तो वहीं उनके दोनों लाल, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव दोनों को हत्या के मामले में नामजद अभियुक्त बनाया गया है. ऐसा आपराधिक चरित्र इस परिवार की विशेषता है र्और फिर से सत्ता प्राप्त करने के लिए विधानसभा चुनाव में इस परिवार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

पैसा बनाने के लिए राजनीतिक अपराध को अंजाम देने में लालू यादव को महारत हासिल थी. पूर्णिया में राजद के एससी-एसटी कोषांग के महासचिव शक्ति कुमार मल्लिक की हत्या भी पैसों की वजह से ही हुई. राजद का एक बड़ा गुंडा मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तो सिवान में अपना तो साम्राज्य ही खड़ा कर लिया था. उसे लालू यादव का पूरा संरक्षण प्राप्त था. वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है लेकिन राजद में आज भी वह एक बड़ा पद धारक है.

अब तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव को पूर्णिया हत्या मामले में नामजद अभियुक्त होने की वजह से अखबारों में विज्ञापन देना पड़ेगा. उनपर कौन-कौन धाराएं लगी हैं, उसका डिटेल देना होगा. क्योंकि ऐसा करने का आदेश चुनाव आयोग का है जिसे उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया है. सीएम पद के दावेदार उम्मीदवार के लिए शायद यह पहला मामला है और इसलिए राजद के खेमे में काफी बेचैनी बनी हुई है.

राजद के डीएनए में गड़बड़ी और हत्या के मामले में दोनों भाइयों को नामजद अभियुक्त बनाए जाने का मैसेज भले बड़ा हो, लेकिन राजद का दिखावा यह है कि इसका उस पर कोई असर नहीं है. इस बीच राजद ने प्रथम चरण के अपने कोटे से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा किए बगैर उनको सिंबल देना शुरू कर दिया है और अभी तक कुल 27 उम्मीदवारों को सिंबल दिया गया है जिनमें 13 सिटिंग विधायक हैं. यह भी अपने आप में एक पहला मामला ही है कि महागठबंधन के साझा उम्मीदवारों की सूची जारी किए बिना ही और अपने उम्मीदवारों के नाम बगैर घोषित किए ही राजद ने सिंबल देना शुरू किया है.