यह जातीय ‘गणना’ है, ‘जनगणना’ नहीं; इसका अधिकार सिर्फ केंद्र के पास – बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| बिहार में होने वाला जातीयत गणना को ‘जनगणना’ नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ‘जनगणना’ का अधिकार सिर्फ केंद्र को है, किसी राज्य को नहीं. यह बात शनिवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल (Sanjay Jaiswal) ने कही.

जायसवाल ने राज्य में होने जाने वाली जातिगत गणना (Caste Based Survey) पर कहा कि इसको ‘जनगणना’ कहना गलत होगा. जनगणना कराने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है. उन्होंने कहा कि इसे ‘गणना’ या ‘सर्वे’ कहा जाना चाहिए.

उन्होंने इशारा किया कि सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) भी इसे जाति आधारित ‘गणना’ कह रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी इसे ‘सर्वे’ बता रहे हैं, इसलिए इसे जातिगत ‘गणना’ ही कहा जाए.

इस कार्य पर होने वाले व्यय के बारे में जायसवाल ने कहा कि बिहार विधानसभा के सभी विधायकों ने मिलकर सर्वसम्मति से इसे पास किया है. इसलिए जातीय गणना पर होने वाले 500 करोड़ रुपये खर्च पर सवाल उठाना ठीक नहीं है. दरअसल, वे वीआईपी नेता मुकेश सहनी के उस बयान का जवाब दे रहे थे जिसमें सहनी ने कहा था कि जातीय गणना पर होने वाले खर्च के लिए अलग से फंड बनाया जाए जिसमें राज्य के जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल सहयोग करें.

रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमान उठा रहे गलत फायदा

संजय जायसवाल ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में मैंने अपनी आशंका जाहिर की है कि इस सर्वे के आधार पर रोहिंग्या (Rohingya) और बांग्लादेशी मुसलमान (Bangladeshi Muslims) अपनी नागरिकता का आधार न बनाएं. सीमांचल में सवर्ण मुसलमान खुद को पिछड़ा बताकर अपना फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

इस मामले पर उन्होंने याद दिलाया कि एक पूर्व मंत्री ने भी फॉरवर्ड होते हुए भी खुद को पिछड़ा बताया था. मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दल और सहयोगियों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को देखते हुए कोई फैसला लेंगे.

एफएफएल और एफएसआई की लेबोरेट्री का होगा उद्घाटन

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार को रक्सौल में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) एफएफएल और एफएसआई की लेबोरेट्री का उद्घाटन करेंगे. अभी तक नेपाल से जो भी खाद्य पदार्थ, रिफाइंड ऑयल या कोई अन्य सामान आता था या कोई सामान बिहार से विदेश जाता था तो उसकी चेकिंग कोलकाता में होती थी. इस जांच प्रक्रिया में 15 दिन के आसपास समय लगता था, लेकिन अब नेपाल से सटे बिहार के रक्सौल में लिबर्टी खुल जाने से 15 दिनों का काम 15 घंटे में होगा. यह नेपाल और भारत के संबंध को मजबूत करेगा.

(इनपुट-एजेंसी)