जांच एजेंसियों को लेकर पिता से ज्यादा परिष्कृत है तेजस्वी का बड़बोलापन

पटना (TBN – अनुभव सिन्हा)| आईआरसीटीसी घोटाले (IRCTC Scam) में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Deputy Chief Minister Tejashwi Yadav) को मिली जमानत रद्द करने की सीबीआई (CBI) पहल से पैदा हुए दबाव से राजद (RJD) का पूरा कुनबा सकते में है. लेकिन अपने कुनबे का मनोबल बनाए रखने के लिए तेजस्वी यादव ने जांच एजेंसियों (सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स) का मजाक उड़ाते हुए कहा कि सभी केंद्रीय एजेंसियां उनके आवास पर कार्यालय खोल सकती हैं.

राजद एक परिवारवादी पार्टी है और इसके अगले खेवनहार तेजस्वी यादव ही हैं. अभी सीएम पारी की शुरुआत भी नहीं कर पाए तेजस्वी एक तरह से पिता लालू यादव (Lau Yadav) से दो कदम आगे नजर आते हैं. लालू यादव जब दूसरी बार सीएम बने तब चारा घोटाला सामने आया था, लेकिन तेजस्वी तो डिप्टी सीएम के अपने पहले टर्म में ही आईआरसीटीसी घोटाले में चार्जशीटेड हो गए थे. इसकी वजह से 2017 के जुलाई में सरकार से बाहर होना पड़ा. 2018 से जमानत पर हैं.

अपने आवास पर जांच एजेंसियों को कार्यालय खोलने का आफर देना तेजस्वी के आदर भाव से ज्यादा पार्टी की मजबूती दर्शाता है, फिर भी यह थोड़ा परिष्कृत कहा जायेगा. क्योंकि उनके पिता जब सीएम थे तब नौकरशाही को वह क्या समझते थे, हो सकता है नई पीढ़ी के युवाओं को इसकी जानकारी न हो. चीफ सेक्रेटरी को ‘बड़ा बाबू’ और डीजीपी से ‘सुरती बनवाकर’ एक झटके में ही पालिटिकल बास होने का रुतबा दिखा दिया था. इतने से सूबे भर की पुलिस शांत हो गई और अपराधियों ने हर तरह से अशांति फैला दी, जिसे बाद में ‘जंगल राज’ (Jungle Raj) का खिताब पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) ने दिया था.

लालू यादव परिवार से जांच एजेंसियां भली-भांति परिचित हैं. बहुत पुराना रिश्ता है और आज भी इस अर्थ में बना हुआ है कि जांच की जद में पिता के बाद तेजस्वी, तेज प्रताप सहित पूरा परिवार आ गया है.

अपने पिता की पिच पर तेजस्वी की बैटिंग पारी कितनी लम्बी चलेगी, यह फिलहाल आंकलन के दायरे में नही है. लेकिन अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने में जिस बात का ध्यान तेजस्वी यादव ने रखा, उसका स्तर उनके शिक्षित होने की स्थिति में दूसरा हो सकता था, पर ऐसा प्रतीत होना सम्भव इसलिए नही क्योंकि महत्वाकांक्षा और भ्रष्ट आचरण का दबाव उत्कृष्टता में बाधक होता है.

तेजस्वी यादव को अपने भ्रष्ट आचरण के जरिए राजनीति करने का इतना ही विश्वास है तो पटना में जांच एजेंसियों के दफ्तर बंद कराए जा सकते हैं बजाय इसके कि एजेंसियां उनके आवास पर अपना कार्यालय खोलें. यह बड़बोलापन कि सीबीआई को वह सहयोग करते हैं, यह कहने की जरुरत ही नही थी. असहयोग करते और सबलोग देखते.

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1995 के बाद से भ्रष्टाचार की राजनीति का गवाह बना बिहार आज भी उसके ट्रैप से बाहर नही निकल पाया है. और अब तो तेजस्वी को बिहार का भविष्य भी बताया जा रहा है. ऐसी हर बात कही जा रही है जिससे यह पुख्ता होता रहे. तो तेजस्वी को भ्रष्टाचार की राजनीति करने से कैसे रोका जा सकता है ? समर्थन में वह देश भर के विपक्ष का नाम ले सकते हैं जो इन्ही जांच एजेंसियों की जद में भ्रष्टाचार के ही कारण हैं.

बीते 24 अगस्त को विधानसभा में महागठबंधन की सरकार ने विश्वास मत हासिल किया था. तेजस्वी यादव इस सरकार में डिप्टी सीएम हैं. लेकिन उस दिन सुबह से ही सीबीआई उन छह लोगों के यहां छापा मार रही थी जो लालू और तेजस्वी यादव के बेहद करीबी हैं. इससे तिलमिलाए तेजस्वी यादव ने सीबीआई को धमकी दी थी जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ. इसके बाद ही सीबीआई ने डिप्टी सीएम की जमानत रद्द किए जाने का आवेदन विशेष अदालत में दिया है और तबसे बिहार में पूरा राजद कुनबा सकपकाया हुआ है.