तेजस्वी के 10 लाख नौकरी देने की बात पर सुशील मोदी ने उठाये सवाल

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार लगातार जारी है. प्रत्याशियों द्वारा जनता को रिझाने की कोशिश भी जारी है. इसी बीच पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी यादव की एक बयान बड़ी सुर्ख़ियों में है. दरअसल अपने चुनावी सभा के दौरान तेजस्वी यादव ने जनता को ये आश्वाशन दिया था कि अगर वो इस बार के बिहार विधान सभा चुनाव जीते तो पहली कैबिनेट से ही 10 लाख लोगों को नौकरियां दिलाएंगे.

तेजस्वी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. मुख्यमंत्री तो यहां तक कह चुके हैं कि 10 लाख लोगों को नौकरी तो देंगे, तो पैसा कहां से, जेल से आयेगा? अब सुशील मोदी ने आंकड़ों के माध्यम से विपक्ष को घेरा है. उपमुख्यंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि दोपरशंखी घोषणाओं के तहत यदि वास्तव में दस लाख लोगों को सरकरी नौकरी दिया जाये तो राज्य के खजाने पर 58,415.06 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. इसके अलावा पूर्व से कार्यरत 12 लाख से ज्यादा कर्मियों के वेतन मद में होने वाले खर्च 52,734 करोड़ को इसमें जोड़ लें, तो यह राशि 1,11,189.06 करोड़ होती है.

जब विपक्ष वेतन पर ही बजट का अधिकांश भाग खर्च करेगा, तो फिर पेंशन, छात्रवृत्ति, साइकिल, पोशाक, मध्याह्न भोजन, कृषि अनुदान, फसल सहायता, पुल-पुलिया, सड़क, बिजली आदि तमाम योजनाओं के लिए पैसे कहां से आयेंगे? वर्तमान में बजट का आकार 2,11,761 करोड़ का है, अगर वेतन में ही 1,11,189.06 करोड़ रु. खर्च होगा तो फिर ब्याज, पुराने कर्ज के भुगतान सहित अन्य 1,28,979 करोड़ के प्रतिबद्ध व्यय के लिए राशि कहां से आयेंगी?

मोदी ने कहा कि विपक्ष के झूठे वायदों के अनुसार अगर 1.25 लाख चिकित्सक और 2.50 लाख पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होती है तो वेतन पर 22,270.95 करोड खर्च होगा. 2.50 लाख शिक्षकों व 50 हजार कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति पर वेतन मद में 20,352.66 करोड़, 95 हजार पुलिस की बहाली पर 3604.22 करोड़, इंजीनियर (जेई) के 75 हजार पदों की बहाली पर 5,780.43 करोड़ व दो लाख अनुसेवकों की नियुक्ति पर वेतन मद में सालाना 6,406.80 करोड़ यानी कुल 58,415.06 करोड़ का खर्च आएगा. दरअसल झांसा देकर वोट लेने के मकसद से विपक्ष मतदाताओं से ऐसा वायदा कर रहा है, जिसे वह कभी पूरा ही नहीं कर पाएगा.