सूबे के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का इस्तीफा

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| सूबे में रविवार को एक बड़ी खबर सामने आई जब राज्य के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह (Bihar Agriculture Minister Sudhakar Singh), जो हाल ही में अपने विभाग में “बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार” के मुद्दों को हरी झंडी दिखाने के लिए सुर्खियों में रहे हैं, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

उनके पिता जगदानंद सिंह, जो राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष (Jagdanand Singh, state president of Rashtriya Janata Dal) भी हैं, ने कहा, “बिहार के कृषि मंत्री जो किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं, ने अपना इस्तीफा सरकार को भेज दिया है. हम नहीं चाहते कि सरकार को इस शर्मिंदगी में और घसीटा जाए.”

इधर बार-बार फोन करने के बावजूद सुधाकर सिंह से संपर्क नहीं हो सका. इससे पहले 1 अक्टूबर को कृषि मंत्री ने कहा था कि वह तब तक आराम नहीं करेंगे जब तक कि कृषि उत्पाद विपणन समिति (Agriculture Produce Marketing Committee) अधिनियम और ‘मंडी’ प्रणाली (Mandi system) को बहाल नहीं कर दिया जाता है, जिसे 2006 में खत्म कर दिया गया था. उन्होंने कहा, “उन्हें खत्म करने का फैसला किसान विरोधी था.”

46 वर्षीय सुधाकर सिंह, पहली बार महागठबंधन (Grand Alliance) कैबिनेट में मंत्री बने हैं और राज्य में पिछले 2020 के विधानसभा चुनावों में राजद के टिकट पर कैमूर जिले के रामगढ़ (Ramgarh in Kaimur district) से विधायक के रूप में चुने गए थे.

सुधाकर सिंह ने कहा था, “मैं राज्य में महागठबंधन सरकार के गठन के साथ अपने विभाग में भाजपा के एजेंडे को जारी नहीं रखने दूंगा.” सिंह, हाल ही में यह कहते हुए सुर्खियों में आए थे कि उनके विभाग के सभी अधिकारी “चोर हैं और इस तरह विभाग के प्रमुख होने के नाते वह “चोरों का सरदार” हैं.

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इसके अलावा, दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक सिंह, जो अपनी सीधी-सादी बातों और सादगी के लिए जाने जाते हैं, ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा था, “तीन कृषि रोडमैप के बावजूद, जिस पर बिहार सरकार ने पिछले 17 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, अनाज का कुल उत्पादन राज्य में 2021-22 में 1.76 लाख टन जबकि 2011-12 में 1.77 लाख टन था. मेरे विभाग में हर चीज को ओवरहाल करने की जरूरत है.”

कुछ दिन पहले, अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक सभा को संबोधित करते हुए, सुधाकर सिंह ने लोगों से कहा था कि “यदि वे रिश्वत मांगते हैं तो अपने विभाग के अधिकारियों को जूते से पीटें.”

युवा कृषि मंत्री के इन सभी बयानों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन गया था. सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि “उन पर अपना इस्तीफा देने का दबाव था.”

कहा जा रहा है कि उन्होंने (सुधाकर सिंह) अपना इस्तीफा उपमुख्यमंत्री और राजद के नेता तेजस्वी यादव को भेज दिया है.

हाल ही में एक मीडिया हाउस से बात करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा था, “समस्या यह है कि जब आप विपक्ष के साथ होते हैं तो आप लोगों के मुद्दों को उठाते रहते हैं लेकिन एक बार जब आप सरकार का हिस्सा बन जाते हैं तो आप उन्हीं लोगों और मुद्दों से अलग हो जाते हैं.”

उन्होंने कहा था, “मैं ऐसा नहीं करने जा रहा हूं. मैं राज्य के किसानों के अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की शिकायतें उठाता रहूंगा, चाहे कोई इसे पसंद करे या न करे.”

सुधाकर सिंह ने कहा था, “राज्य के कृषि मंत्री होने के नाते, क्या कोई मुझे बता सकता है कि मुझे किसानों की शिकायतों के मुद्दों को क्यों नहीं उठाना चाहिए? और वह भी, जब हमारे राज्य की 80% आबादी कृषि पर निर्भर है. क्या आप पिछले 17 वर्षों में किसानों की शिकायत निवारण की कल्पना कर सकते हैं (नीतीश कुमार नवंबर 2005 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं), मुख्यालय या जिला स्तर पर कोई निवारण प्रकोष्ठ नहीं है जहां किसान बीज या उर्वरक से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें.”

उन्होंने आगे कहा था कि वह केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के प्रति जवाबदेह हैं. उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने पार्टी प्रमुख से जो भी निर्देश मिलेगा, उसका वे पालन करेंगे. उन्होंने जोर देकर कहा था कि राज्य के कृषि मंत्री होने के नाते वह किसानों के मुद्दों को उठाना बंद नहीं कर सकते हैं.