सभी पार्टियों ने अल्पसंख्यकों को सिर्फ छलने का किया है काम – आफताब

सारण (TBN रिपोर्ट) | बिहार में एक तरफ राजद थाली -कटोरा बजा कर भाजपा की वर्चुअल रैली का विरोध करते हुए गरीब अधिकार दिवस मना रही हैं. वहीँ  कांग्रेस भी मजदूरों और गरीबों के हक़ के लिए धरने कर रही हैं. लेकिन सभी राजनीतिक दलों पर झूठ और धोखे के सहारे अल्पसंख्यक मुस्लिमों को दगा देने जैसे आरोप लगाते हुए समाज सेवी हाजी आफताब आलम खान ने कहा है कि हिन्दुस्तान में सेक्युलरिज्म का झूठा दम भरने वाली सभी राजनीतिक पार्टियों ने अल्पसंख्यक मुस्लिमों को सिर्फ़ छलने का काम किया है.

हाजी आफताब आलम खान ने कहा है कि आर्थिक समाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक मुस्लिम गरीब मजबूर बेसहारा लोगों को दूसरी पार्टियों का ख़ौफ़ दिखा कर उनके मताधिकार का दुरूपयोग किया गया है. ऐसी सभी राजनीतिक पार्टियों का अंदुरूनी चेहरा सामने आ चुका है. ख़ासतौर से बिहार के अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोग ऐसी गंदी राजनीति करने वाले नेताओं की फ़रेबी बातों के जाल में अब नहीं आने वाले है.

आफताब ने नेताओं पर हमला करते हुए कहा है कि अपने आपको ग़रीबों पिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों के हितैषी और हमदर्द  कहने वाले नेतागण मुस्लिम अल्पसंख्यकों के उपर हो रहे ज़ुल्म और उनकें मुद्दों पर हमेशा ख़ामोश क्यों हो जाते हैं. आफताब ने सवाल करते हुए कहा कि क्या बिहार के मुस्लिम समुदाय के लोग सिर्फ़ एक संख्या के समान है जिनका इस्तेमाल सिर्फ़ चुनाव में वोट के लिए ही किया जाता है. क्या मुसलमानों को सम्माजनक राजनीतिक भागीदारी और उनके विकास का कोई हक़ नहीं है. 

आगे उन्होंने कहा कि सारण ज़िला में वर्ष 2016 में एक वीडियो वायरल मामले में तमाम तथाकथित सेकयूलर नेताओं और पार्टियों का चेहरा बेनक़ाब हो चुका हैं ऐसे मतलबी पार्टियाँ और नेतागण सिर्फ़ अपने निजी फ़ायदे के लिए समाज में द्वेष फैलाकर नफ़रत का ज़हर घोलते है और वक़्त आने पर पीठ दिखा कर भाग खड़े होते है. तेजस्वी पर तंज कसते हुए हाजी आफताब ने कहा कि चुनाव की सुगबुगाहट पाकर थाली पिटने वाले नेता और राजनीतिक दल अपने सरकार की उपलब्धि बताएँ कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कौन-कौन सी अल्पसंख्यक कल्याणकारी योजनाएँ बनाई थी और उस दिशा में अब तक क्या कार्य हुआ है. 

हाजी आफताब आलम खान ने कहा है कि अल्पसंख्यको के लिए उनकी सरकार की उपलब्धि क्या रही है और बिहार के प्रवासी मज़दूरों के लिए उनकी सरकार ने अपने दौर में क्या किया था जिससे बिहार के मज़दूर दूसरे राज्यों में रोटी की जुगाड़ में ना जाएँ. बिहार के सभी अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों का ऐसे नेताओं और नफ़रत फैलाने वाली सभी राजनीतिक पार्टियों से मोहभंग हो चुका है अब मुस्लिम समाज के लोग सेक्युलरिज्म के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वालें किसी भी राजनीतिक दल या नेता के बहकावों में नहीं आने वालें हैं. मुस्लिम समुदाय के लोग संगठित होकर सही समय पर सही फ़ैसला लेने की ठान ली हैं.