कश्मीर: बिहारी मजदूरों की हत्या की राजनीतिक पार्टियों ने की निंदा, सीएम नीतीश को माना जिम्मेवार

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| कश्मीर (Kashmir) में आजकल आतंकवादी (Terrorists) ‘टारगेट’ किलिंग (Target Killing) जैसी घटना को अंजाम दे रहे हैं. वे गैर-कश्मीरियों (Non-Kashmiris) को टारगेट बनाते हुए उनकी हत्या कर रहे हैं.

इसी कड़ी में पिछले 13 दिनों में आतंकियों ने अभी तक 4 बिहारियों की हत्या कर दी है. जहां रविवार 17 अक्टूबर को अनंतनाग में बिहार के राजा ऋषिदेव और जोगिंदर की हत्या कर दी, वहीं 16 अक्टूबर को बांका जिला के अरविंद कुमार साह की हत्या कर दी थी. 5 अक्टूबर को भागलपुर के वीरेंद्र पासवान की हत्या हुई थी.

घाटी में आतंकवादियों द्वारा की जा रही ‘टारगेट किलिंग’ ने चिंता को बढ़ा दी है. पूरे इलाके में आतंकवादियों के आंतक से लोग भयभीत हैं. इन घटनाओं पर पूरे देश में तमाम राजनीतिक पार्टियों द्वारा घटना की निंदा की जा रही है.

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav RJD) ने नीतीश सरकार (Nitish Kumar CM Bihar) पर हमला बोलते हुए कहा, ‘कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा आज फिर बिहार के दो श्रमवीरों को मौत के घाट उतारने की दुखद खबर सुन मर्माहत हूं. यह डबल इंजन सरकार की इंटेलिजेंस व सिक्योरिटी फेल्योर है. नीतीश जी की गलत नीतियों की वजह से रोज़ी-रोटी के लिए पलायन करने वाले श्रमिकों को अब जान से हाथ धोना पड़ रहा है.’

वहीं, लोजपा-रामविलास के नेता चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने भी कश्मीर में दो नागरिकों की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कश्मीर के राज्यपाल से संवाद स्थापित करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी और बिहारी की इस तरह से निर्मम हत्या न हो. पीड़ित परिवार को मुआवज़ा देने से कुछ नहीं होगा. हम मांग करते हैं कि नीतीश कुमार उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दें.’

जम्मू कश्मीर में बिहारी मजदूर की हत्या को लेकर सोमवार को राजधानी पटना में लोजपा कार्यकर्ताओं द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ईमरान खान का नाम ईमरान डॉग लिखकर उसका पुतला जलाया गया. वही लोजपा नेता कृष्णा सिंह ‘कल्लू’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि पहले पाकिस्तान के ऊपर हुए सर्जिकल स्ट्राइक की तरह एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक हो.

कुछ लोगों ने यह भी ट्वीट किया है कि बिहार से कश्मीर क्यूँ कमाने गए , शायद इसपे भी बात होनी चाहिए. लोगों के अनुसार, जब लोगों को अपने ही राज्य में रोज़गार नहीं मिलता है, तब ही लोग बाहर जाकर कमाने की सोचते हैं. आखिर कब तक सरकार यूँ ही लोगों को रोजगार के लिए बाहर भेज कर अपना पल्ला झाड़ती रहेगी और यह काफ़ी दुखद है.