जिस नरेंद्र मोदी को बिहार आने से रोका, उन्हीं के साथ खड़े हैं आज नीतीश – PK

 

पटना (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट)– राजधानी पटना में मंगलवार को जदयू के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) ने एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का खुलकर जवाब दिया. प्रशांत किशोर ने बिहार के विकास, गठबंधन सरकार और बिहार की राजनीति समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अपने विचार व्यक्त किये.

प्रशांत किशोर ने बिहार में विकास के मुद्दे पर कहा कि “वर्ष 2004 के बाद से भाजपा के साथ पहले से जिस तरह से जदयू खड़ा रहा है और आज जिस तरह से हैं, उसमें जमीन आसमान का फर्क है. जिस नरेंद्र मोदी को उन्होंने बिहार में आने से रोका, आज उन्हीं के साथ खड़े हैं. नीतीश कुमार हमसे कहते थे कि राजनीति में थोड़ा बहुत समझौता करना पड़ता है. बिहार के विकास के लिए समझौता करना पड़े तो कर सकते हैं. पर, मूल बात बिहार के विकास का है, तो यह देखना होगा कि क्या बिहार का विकास हो रहा है”.

बिहार में सरकार के गठबंधन को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि “समझौता के बाद भी बिहार में क्या इतनी तरक्की हो गई जितनी बिहार के लोगों की अपेक्षा और आकांक्षा है. क्या विशेष राज्य का दर्जा मिला? पटना विवि को केंद्रीय विवि बनाने के लिए आग्रह मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर किया था पर, केंद्र सरकार ने इस पर कोई जवाब तक नहीं दिया. आखिर किस कीमत पर गठबंधन. सिर्फ दो सीट ज्यादा लेने के लिए या मुख्यमंत्री बने रहने के लिए. पीके ने कहा कि मेरा मानना है कि बिहार के लिए नीतीश कुमार खड़े होंगे तो किसी के गठबंधन की जरूरत उन्हें नहीं होगी”.

 

आगे प्रशांत किशोर ने कहा कि “पता नहीं नीतीश कुमार गलत बयानी क्यों कर रहे हैं कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर उन्होंने मुझे जदयू में शामिल किया था. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लोग जाति से अलग हटकर विकास के नाम पर वोट करते हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी को बिहार में विकास पर हो वोट मिला था. सीपीआई नेता कन्हैया कुमार पर कहा कि वे कुछ बिहार के हैं और यहां पर कुछ करना चाहते हैं तो मुझे उससे गुरेज नहीं है”.

चुनाव प्रचार और किसी पार्टी में आने के सवाल पर  प्रशांत किशोर ने कहा कि “मैं यहां इसलिए नहीं बैठा हूं कि कोई गठबंधन बनाकर नीतीश कुमार को हरा दिया जाये. या, किसी पार्टी को रोक दिया जाए. किसी भी पार्टी के प्रचार में यहां मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं बिहार की जनता को बताना चाहता हूं जबतक जीवित हूं, बिहार के लिए समर्पित हूं. बिहार के गांव-गांव से लड़कों को जोड़कर, समझाकर और सिखाकर वो राजनीतिक शक्ति खड़े करेंगे, जो बिहार को अग्रणी राज्य की श्रेणा में लाने के लिए आना चाहता है, उसे जोड़ना चाहता हूं. ताकि दस हजार अच्छे मुखिया जीत कर आएं”.

बिहार की राजनीति में बदलाव लाने के मुद्दे पर पी के ने कहा कि  “इसमें कोई विवाद नहीं है कि नीतीश कुमार बिहार में 200 ऐसे विधायक नहीं बना पाये, जो बिहार की राजनीति परिस्थिति को बदल सके. बिहार में राजनीतिक नेतृत्व खड़ा हो, इसी मकसद से 20 फरवरी से बात बिहार की नाम से नया कार्यक्रम शुरू करने जा रहा हूं. तीन लाख लड़के इससे जुड़ गए हैं. 20 मार्च तक दस लाख लड़कों को इससे जोड़ना है. अगले कुछ दिनों में बिहार के 8387 पंचायतों में से एक हजार ऐसे लोगों को चिह्नित कर, उनसे जुड़ना है, जो समझते हैं कि बिहार का अगला दस साल ऐसा होना चाहिए, जो देश के सबसे अग्रणी दस राज्यों में बिहार शामिल हो. बाद में उसका स्वरूप क्या होग? पार्टी बन जाएगी, मोर्च बन जाएगा. इसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं है”.