ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन राजद ही कर सकता है !!

पटना (वरिष्ठ पत्रकार अनुभव सिन्हा की कलम से) | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का सांस्कृतिक पक्ष कितना समृद्ध है इसका अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है ? एक राजनीतिक दल का सांस्कृतिक पक्ष उसकी नीतियों का दर्पण होता है. उसकी छोटी से छोटी गतिविधियां भी उसकी समग्र नीति का हिस्सा मानी जाती है. इसलिए सार्वजनिक रूप से उसकी हर गतिविधि पर लोगों का ध्यान जाता है. ऐसे में, अवसर जब गणतंत्र दिवस (Republic Day 2022) जैसे राष्ट्रीय पर्व का हो और इस अवसर पर जश्न मनाने के लिए बार-बाला डांस आयोजन को राजद सांस्कृतिक गतिविधि बताए तो उसपर सवाल उठेंगे.

इतना ही नहीं, बार-बाला का डांस आयोजित कर उसे न सिर्फ सही ठहराने की कोशिश की गई बल्कि बार-बालाओं को अपने घर की बहन-बेटी बताते हुए उन्हें गंदी नजर से न देखने की विवादास्पद नसीहत भी दी गई. यह एक ऐसा तर्क है जो सामाजिक जीवन की सच्चाई से टकराता है. क्या राजद का ऐसा नजरिया उसके सांस्कृतिक पक्ष के बारे में सोचने के लिए विवश नहीं करता ? वह भी तब जब येन-केन-प्रकारेण यह पार्टी सत्ता प्राप्त करने के लिए बेचैन हो !!!!

लेकिन ऐसा हुआ और पटना जिले में हुआ. जिले के मनेर प्रखण्ड के हाफ पूर्व पंचायत में सड़क किनारे 26 जनवरी को बार-बाला डांस का आयोजन (RJD Organised Bar Girl Dance Amid Covid In Maner Patna) कराया गया. पूर्व मुखिया प्रियंका कुमारी और जिला उपाध्यक्ष जय कुमार निराला की देखरेख में यह आयोजन परवान चढ़ा जिसमें ग्रामीणों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. इसमें हैरत की बात नहीं होनी चाहिए कि मनेर थाना को इसकी भनक तक नहीं लगी. झेंप मिटाने के लिए ही शायद थाना प्रभारी राजीव रंजन ने यह कहा होगा कि उनके पास इससे जुड़ी कोई लिखित शिकायत नहीं आई है.

लेकिन साहब यह आयोजन तो राजद का था. खम ठोक कर आयोजनकर्ताओं ने इसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बताया, जिसका एक ही उद्देश्य था कि ज्यादा-से-ज्यादा संख्या में लोग इसका लुत्फ उठाएं, ये कोरोना-वोरोना जैसा कुछ नहीं होता, इसलिए कोरोना गाइडलाईन जैसा भी कुछ नहीं है जिसका पालन करना पड़े.

अभी भी भारत को गांवों का देश ही कहा जाता है. लेकिन बिहार की राजधानी के सटे पश्चिम का मनेर प्रखण्ड राजद के नेतृत्व में न शहरी है, न गंवई. वह गंदगी को प्रश्रय देने वाला है और यह खम भी ठोकता है कि गंदगी को गंदगी न समझा जाए.

अगर बार-बालाएं राजद के अनुसार अपने घर की बहन-बेटियां हैं तो बहन बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार किसी सभ्य समाज का हिस्सा कैसे हो सकता है ? सांस्कृतिक पक्ष के नाम पर राजद की ऐसी मक्कारी ही लोगों में भय पैदा करती है. सोचिए, अगर यह पार्टी सत्ता में आ गई तब “जंगल राज प्रकरण-2” कैसा होगा ?

(उपरोक्त लेखक के निजी विचार हैं)