मजदूरों पर लाठी चार्ज कहां का न्याय है – एजाज़ अहमद

पटना (TBN रिपोर्ट) | लॉकडाउन के दौरान देश के कई राज्यों में फसे हुए मजदूर अपने घर वापसी के लिए मांग कर रहे है. इसी क्रम में गुजरात के सूरत में उत्तर प्रदेश तथा बिहार के मजदूर घर जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन मजदूरों पर पुलिस के द्वारा बार-बार लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. 

इसको लेकर जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद ने कहा कि अफसोस की बात है, कि एक ओर जहां विदेशों से बंदे यात्रा के माध्यम से स-सम्मान लोगों को विमानों से लाया जा रहा है ,वहीं दूसरी ओर गरीब मजदूरों को डंडे मारकर उन्हें अपने गांव भी जाने नहीं दिया जा रहा है यह कहां का न्याय है .

एजाज अहमद ने कहा कि गुजरात में गरीब मजदूरों को ना तो उनके रहने की व्यवस्था की है और ना ही खाने की व्यवस्था है, और जब यह मजदूर अपने घर वापसी की मांग करते हैं तो इन्हें पुलिस के द्वारा पिटवाने तथा प्रताड़ित करने का घृणित कार्य गुजरात की रुपाणी सरकार करती है . ऐसा लग रहा है कि देश में सिर्फ हवाई जहाज से आने वालों के रहने और लग्जरी जीवन जीने का अधिकार मिला हुआ है और दूसरी तरफ गरीबों एवं मजदूरो को लाठी और आंसू गैस के गोले खाने का अधिकार दे दिया गया है, यह सरासर अन्याय है और ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत देती है कि देश के लोगों के साथ भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है ,जो कहीं से भी उचित नहीं है .

एक ओर जहां पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के द्वारा मजदूरों के साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है जिस कारण मजदूरों में बेचैनी देखी जा रही है जहां एक ओर संबंधित राज्य सरकार की ओर से उनके रहने और खाने की व्यवस्था नहीं की जा रही है वहीं दूसरी ओर उनके राज्यों में वापस जाने के लिए भी रेलवे के द्वारा कोई उचित व्यवस्था नहीं की जा रही है .और दिन प्रतिदिन भारत सरकार के द्वारा नए-नए गाइडलाइन लाए जा रहे हैं जहां एक और मदिरालय को खुली छूट दे दी गई है वही मजदूरों के लिए रैन बसेरा तक की व्यवस्था नहीं है, यह कहां का न्याय है. क्या ऐसे संकट के समय में भी राज्यों के साथ भेदभाव की नीति अपनाई जाएगी यह बात समझ से परे है

एजाज ने आगे कहा कि नीतीश कुमार इस मामले में गुजरात सरकार से बात करके अभिलंब बिहारी मजदूरों की वापसी सुनिश्चित करें क्योंकि स्थिति और विकराल रूप से सामने आने वाली है क्योंकि गुजरात सरकार का रवैया बिहारियों के प्रति ठीक नहीं है .