कन्हैया कुमार की रैली में मोदी मुर्दाबाद के नारे

पटना (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट)- बिहार विधान सभा चुनाव में अपनी पैंठ ज़माने के लिए जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और वामपंथी नेता कन्हैया कुमार इन दिनों रैली और सभाओं में व्यस्त हैं. कन्हैया कुमार बिहार में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), और  राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ जन-गण-मन यात्रा निकाल रहे हैं. यात्रा के समापन समारोह के लिए कन्हैया ने गुरुवार को पटना के प्रसिद्ध गांधी मैदान में ‘संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ’ रैली का आयोजन किया था रैली में भारी भीड़ के साथ, नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी, पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन और दिवंगत मार्क्सवादी नाटककार और निर्देशक सफदर हाशमी की बहन शबनम हाशमी जैसी हस्तियों ने भी शिरकत की थी.

“संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ” रैली में कन्हैया कुमार ने अपने भाषण को शुरू करने से पहले रैली में शामिल लोगों से राष्ट्रगान गाने की अपील की थी. सभी लोगों के साथ राष्ट्रगान गाते हुए कन्हैया कुमार राष्ट्रगान की अंतिम दो लाइनों को भूल गए. स्वयं को “राष्ट्र हित के लिए जान न्योछावर करने वाला” कहने वाले कन्हैया कुमार के लिए भारत के “राष्ट्रगान”  का भूल जाना बड़ा अचंभित करता है.

रैली में कन्हैया कुमार ने कहा कि “सरकार और विपक्ष दोनों खुद को बधाई देने में व्यस्त हैं. मैं अपनी बधाई भी देता हूं. लेकिन उन सभी के लिए जो यहां मौजूद हैं, मैं कहूंगा कि यह आधी जीत है. जब तक एनपीआर की कवायद वापस नहीं ले ली जाती, हम गांधी के सविनय अवज्ञा से सबक हासिल कर अपने आंदोलन को विफल नहीं होने देंगे”. आगे उन्होंने कहा कि “ग्रामीणों को अपने संबंधित पंचायत प्रमुखों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहना चाहिए कि जब एनपीआर को मई में निर्धारित किया जाना है, तो किसी भी एनपीआर अधिकारी को उनके अधिकार क्षेत्र में दस्तक देने की अनुमति नहीं है”.

सरकार के ऊपर निशाना साधते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि “हमें एक लंबी और कठिन लड़ाई के लिए तैयार होना होगा. हम एक ऐसे शासन के तहत रह रहे हैं, जो डाक्टर कफील अहमद जैसे कर्तव्यनिष्ठ पेशेवरों को सलाखों के पीछे भेज देता है और उसके कार्यों पर सवाल उठाने पर किसी को भी राष्ट्र विरोधी घोषित कर देता है”.

कन्हैया कुमार ने भरी भीड़ में अपने समर्थकों और रैली में शामिल हुई हस्तियों के बीच मंच पर खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोधी भाषण करवाए. कन्हैया कुमार ने मंच पर एक बच्चे को मोहरा बनाकर खड़ा कर दिया और बच्चे ने आजादी के नारे लगाते हुए कहा कि “अगर भारत में ताजमहल और लालकिला ना होता तो क्या पीएम अमेरिकी राष्ट्रपति को गाय और गोबर दिखाते? एक छोटा सा बच्चा जिस तरह गुस्से में  मोदी मुर्दाबाद का नारा लगा रहा था और कन्हैया कुमार गोदी में उठाकर उस बच्चे का समर्थन कर रहा था उससे तो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो उस छोटे से बच्चे की आड़ में कन्हैया कुमार भारत की सम्पूर्ण जनता को ये सन्देश देना चाह रहा था कि छात्र नेता से राजनीति में प्रवेश करने के बाद वो अब किसी भी हद तक जा सकता है.