Big NewsPatnaPoliticsफीचर

जदयू ने जारी की पदाधिकारियों की नई सूची, ललन सिंह का नाम नहीं

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| जनता दल यूनाइटेड (Janata Dal United) ने शनिवार को अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची जारी की. इस सूची को एक महीने से भी कम समय पहले पार्टी अध्यक्ष बने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) ने मंजूरी दे दी. नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी और अनुभवी समाजवादी नेता वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashishth Narayan Singh), जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तीन साल पहले राज्य इकाई प्रमुख का पद छोड़ दिया था, को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.

वशिष्ठ नारायण सिंह, जिनकी कुमार के साथ दोस्ती 1974 में बिहार में जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन के समय से चली आ रही है, ने मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) की जगह ली है. बता दें, मंगनी लाल मंडल को पिछले साल मार्च में जेडीयू (JDU) का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था. वे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें 2017 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद दिया गया था, के बाद उपाध्यक्ष पद पर आसीन होने वाले दूसरे नेता थे. मंडल को इस बार राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है.

मीडिया में पार्टी के सबसे चर्चित चेहरे केसी त्यागी (KC Tyagi) को “राजनीतिक सलाहकार और प्रवक्ता” के रूप में नामित किया गया है.

पूर्व एमएलए राजीव रंजन (Rajib Ranjan) हैं, जो सीएम के गृह जिले नालंदा (Nalanda) के पूर्व विधायक हैं, को प्रवक्ता का पद मिल है. राजीव पिछले साल भाजपा छोड़ने के बाद जेडीयू में लौट आए थे. हालांकि इस बार उनसे राष्ट्रीय महासचिव का पद छीन लिया गया है.

इस बार राष्ट्रीय महासचिवों की संख्या घटाकर 11 कर दी गई है. जबकि पार्टी की अध्यक्षता कर रहे राजीव रंजन सिंह “ललन” (Rajiv Ranjan Singh “Lalan”) के समय पिछले साल मार्च में सामने आई सूची में 22 राष्ट्रीय महासचिव थे. बता दें, राजीव रंजन सिंह “ललन”, इन अफवाहों के बीच कि वह सहयोगी राजद के बहुत करीब आ गए हैं, ने अपने मुंगेर लोकसभा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद पिछले महीने छोड़ दिया था.

इस बार पदाधिकारियों की नई सूची में ललन सिंह का नाम नहीं है. हालाँकि कहा जा रहा है कि उनपर नीतीश कुमार का भरोसा बरकरार है जिस कारण वह अब तक इंडिया ब्लॉक (INDIA bloc) की सभी बैठकों नीतीश के साथ मौजूद रहे हैं.

संजय कुमार झा, जो ललन के अलावा ऐसी सभी बैठकों में नीतीश कुमार के साथ जाने वाले एकमात्र नेता हैं, को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया है. संजय झा राष्ट्रीय महासचिवों की सूची में शामिल होने वाले बिहार के एकमात्र मंत्री हैं.

जिन अन्य लोगों को प्रमुख पद पर बरकरार रखा गया है उनमें राज्यसभा सदस्य रामनाथ ठाकुर शामिल हैं, जिनके दिवंगत पिता कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के सीएम के रूप में कार्य किया था और नीतीश कुमार व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद जैसे नेताओं के गुरु रह चुके थे.

अल्पसंख्यकों को एक स्पष्ट संकेत में, मोहम्मद अली अशरफ फातमी, अफाक अहमद खान और कहकशां परवीन को भी राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया है.

अफाक अहमद खान जेडीयू के पुराने वफादार रहे हैं. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने तेजस्वी यादव, जो अब बिहार के डिप्टी सीएम हैं, पर क्रूर व्यवहार का आरोप लगाते हुए राजद छोड़ 2019 में जदयू जॉइन किया था. भाजपा से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार द्वारा खुद को अल्पसंख्यकों के बीच प्रिय बनाने के प्रयास के रूप में कहकशां परवीन को 35 वर्ष की उम्र में 2014 में राज्यसभा के लिए नामित किया था. हालाँकि, एक अन्य प्रमुख मुस्लिम सदस्य गुलाम रसूल बलियावी को इस बार राष्ट्रीय महासचिवों की नई सूची से हटा दिया गया है.

महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य कपिल हरिश्चंद्र पाटिल, जो कभी दिवंगत नेता शरद यादव के वफादार माने जाते थे, को भी महासचिव पद पर बरकरार रखा गया है.

महासचिवों की सूची में पांच मौजूदा लोकसभा सदस्यों के नाम हटा दिए गए हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, “उन्हें आगामी चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने ले किए पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखा गया है.”

पदाधिकारियों की नई सूची में एकमात्र मौजूदा लोकसभा सदस्य आलोक कुमार सुमन को कोषाध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया है. सुमन गोपालगंज की सुरक्षित सीट से अभी सांसद हैं.

सूची में छह राष्ट्रीय सचिव भी शामिल हैं, जिनमें हरनौत के पूर्व विधायक सुनील कुमार उर्फ ​​​​”इंजीनियर” भी शामिल हैं, जिसका प्रतिनिधित्व नीतीश कुमार ने 1980 के दशक में किया था. सुनील कुमार उर्फ ​​​​”इंजीनियर” पिछले साल राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए 22 नेताओं में शामिल थे. अन्य राष्ट्रीय सचिवों में राजीव रंजन प्रसाद भी हैं, जिन्हें अक्सर समाचार चैनलों पर बहस में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते देखा जा सकता है.

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से गैंगस्टर से नेता बने धनंजय सिंह, जिन्हें पिछले साल राष्ट्रीय महासचिव नामित किया गया था, को नई सूची से हटा दिया गया है.