पूर्व आईपीएस ने शिक्षामंत्री की पत्नी की रहस्यमयी मौत की जांच के लिए लिखा खत

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | पूर्व आईपीएस ऑफिसर अमिताभ कुमार दास ने बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने नियुक्ति घोटाले के साथ चौधरी की पत्नी की मौत के पीछे भी राजनीतिक षड्यंत्र बताया है.

बिहार के पुलिस महानिदेशक को उन्होंने वर्तमान शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी के खिलाफ एक पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने मेवालाल चौधरी की पत्नी नीता चौधरी की रहस्यमय मौत के लिए जांच की मांग की है.

दास ने अपने फ़ेसबुक वाल पर उस पत्र को शेयर किया है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि मेवालाल चौधरी की धर्मपत्नी नीता चौधरी 27 मई 2019 को अपने आवास पर बुरी तरह जल गई थी. उसके बाद 2 जून 2019 को नीता चौधरी की मौत हो गई थी.

उन्होंने आगे लिखा है कि मेवालाल चौधरी पर भागलपुर के सबौर थाने में नियुक्ति घोटाले का मामला दर्ज किया गया था.

दास ने अपने इस पत्र में लिखा है कि उन्हें यह सूचना है कि मेवालाल चौधरी की पत्नी के पीछे एक गहरा राजनैतिक षडयंत्र है. संभवतः नीता चौधरी की मौत के तार, नियुक्ति घोटाले से भी जुड़े हैं.

पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने अपने पत्र के द्वारा डीजीपी से सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर बिहार पुलिस की अद्भुत तत्परता की तरह नीता चौधरी की रहस्यमयी मौत में SIT का गठन कर मेवालाल चौधरी से गहन पूछताछ करने का आग्रह किया है.

जैसा की मालूम है, सोमवार को नीतीश सरकार में मंत्री बनने के बाद से मेवालाल चौधरी पर विपक्ष ने हमला बोलना शुरू कर दिया है. कांग्रेस ने मेवालाल को शिक्षा मंत्री बनाए जाने के बाद नीतीश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि दिन-रात भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के दंभ भरने वाली नीतीश सरकार के इस कारनामे से आमजन इन्हें ढकोसलेबाज की संज्ञा दे रही है.

बता दें कि कि बिहार के नये शिक्षा मंत्री मेवालाल का पहले से विवादों से नाता रहा है. जब मेवालाल चौधरी बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति थे, तब उनपर भर्ती घोटाले का आरोप लगा था. उनपर 2012 में कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में असिस्टेंट प्रोफेसर कम जूनियर साइंटिस्ट के पद की बहाली में घोटाले और धांधली करने का आरोप लगा था.

क्या है मामला

ज्ञातव्य है, मेवालाल चौधरी 2015 में पहली बार जेडीयू विधायक बनने के पहले तक वह शिक्षक के तौर पर सेवा दे रहे थे. वे बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति थे. उनके कुलपति रहते समय साल 2012 में सहायक प्राध्यापक और जूनियर वैज्ञानिकों की बहाली हुई थी. उस वक्त की इस नियुक्ति में धांधली का आरोप लगा था. सबौर कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों व अन्य पदों की नियुक्ति में तत्कालीन कुलपति मेवालाल पर आरोप लगा था कि उन्होंने बिहार के 18 और दूसरे राज्यों के 87 को नौकरी दी थी. यानी 105 में से 18 ही बिहार मूल निवासी थे. कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले का मामला सबौर थाने में 2017 में दर्ज किया गया था. हालांकि इस मामले में उन्होंने कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी और अभी तक कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया है.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने बिहार कैडर के आईपीएस अमिताभ दास को जबरन रिटायरमेंट दे दी थी.

इधर नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा है कि उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं. उनकी भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में संलिप्तता नहीं है. उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में है और न्यायालय का जो भी फैसला होगा, मुझे मान्य होगा.