सेवाशर्त के नाम पर नियोजित शिक्षकों के हाथ में झुनझुना थमाने की कोशिश

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता को संबोधित करते हुए नियोजित शिक्षकों के लिए सेवाशर्त और ईपीएफ की घोषणा की थी. लेकिन शिक्षक संघों ने मुख्यमंत्री की घोषणा को धोखा करार दिया है. इस घोषणा पर कई शिक्षकों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है.

बिहार सरकार के प्रति नाराज़गी जताते हुए बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिलाध्यक्ष शंभू यादव ने कहा कि बिहार सरकार ने सेवाशर्त को शिक्षकों के लिए मृगतृष्णा बना दिया है. जिस प्रकार से रेत के मैदान में दूर कहीं पानी दिख जाता है, लेकिन नजदीक जाने पर पता चलता है कि वहां मात्र रेत ही रेत है. ठीक उसी प्रकार से इस निहित विषय के संदर्भ में विभिन्न स्रोतों से जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार कुछ भी विशेष नहीं है.

साथ ही बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ गोपगुट के जिला सचिव नंदन सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि वह शिक्षकों को कुछ नहीं देना चाहती है. चुनावी वर्ष होने के कारण शिक्षकों के हाथ में झुनझुना थमाने की कोशिश कर रही है.

वहीं टीईटी, एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिलाध्यक्ष प्रमोद मंडल ने कहा कि सेवाशर्त बाहर से भले हरा भरा लगे. लेकिन, अंदर से खोखला है.

बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव कमरे आलम, उपाध्यक्ष प्रशांत झा, प्रखंड सचिव बेनीपुर वीरेंद्र पासवान, टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के जिला कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा ने एक स्वर में नए सेवाशर्त के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर सरकार शिक्षकों की मुख्य मांगों को नहीं मानती है तो शिक्षक पुन: जोरदार आंदोलन को बाध्य होंगे.

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