चिराग की एलजेपी लड़ेगी असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव

पटना / कोलकाता (TBN – The Bihar Now डेस्क)| लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) पार्टी अपना जनाधार को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल और असम में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी. इस आशय की सूचना महासचिव अब्दुल खालिक ने दी है. लेकिन पार्टी ने अभी यह घोषणा नहीं की है कि वह पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में दूसरों के साथ हाथ मिलाएगी या अकेले लड़ेगी.

समाचार एजेंसी के अनुसार, अब्दुल खालिक के हवाले से कहा गया है कि लोक जनशक्ति पार्टी ने आगामी इकाइयों में पश्चिम बंगाल और असम में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

बता दें, LJP की स्थापना 2000 में स्व रामविलास पासवान ने की थी. वर्तमान में स्व पासवान के बेटे चिराग पासवान के नेतृत्व वाली पार्टी पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान 135 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और केवल एक सीट जीती थी, लेकिन वोट शेयर का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने में सफल रही थी.

इस घोषणा के बाद लोजपा अब गैर-बंगाल पार्टियों में शामिल हो गई है. अब यह पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और अन्य के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ेगी.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा दो मुख्य प्रतियोगियों के रूप में है जिससे यह एक कठिन चुनाव बन गया है. भाजपा 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में केवल तीन सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन 2019 के आम चुनावों के दौरान राज्य में 18 सीटें हासिल कीं. यह टीएमसी के पूर्व दिग्गज सुवेंदु अधिकारी की भूमिका में कामयाब रहा, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगे.

चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में समय समय पर हो रहे हिंसा की घटनाओं के साथ राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं. भाजपा ने राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने के लिए सत्तारूढ़ दल को दोषी ठहराया है. हालांकि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.

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पिछले हफ्ते नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एक समारोह में शिरकत की थी. इस समारोह में भाजपा के साथ जुड़े कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगे. इस पर बनर्जी गुस्सा गई थी और समारोह के दौरान बोलने से इनकार कर दिया.

इधर पश्चिम बंगाल विधानसभा ने गुरुवार को केंद्र के विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया।

उधर असम में, 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा अकेली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. उसने 84 सीटों पर चुनाव लड़कर 60 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल 122 में से 26 सीटें जीतने में सफल रही थी. आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को इसी तरह के प्रदर्शन का भरोसा होगा.