‘बागियों’ पर चिराग का एक्शन, चाचा-भाई समेत सभी सांसदों को पार्टी से निकाला

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के पांच बागी सांसदों को मंगलवार को पार्टी से निकाल दिया गया है. इन पांचों बागी सांसदों ने मिलकर चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस के नेतृत्व में चिराग के खिलाफ कदम उठाए थे. इसके ठीक एक दिन बाद पार्टी ने सभी पांच सांसदों को पार्टी की सक्रिय सदस्यता से निलंबित कर दिया है. इस फैसले के बाद वे पार्टी में किसी भी तरह के फैसले लेने के अधिकारी नहीं होंगे.

लोजपा नेता राजू तिवारी ने कहा कि मंगलवार को पार्टी की एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई और इसमें सभी 5 सांसदों को पार्टी से हटाने का फैसला किया गया.

यह पूछे जाने पर कि क्या चिराग पासवान को धोखा दिया गया, तिवारी ने कहा, “एक पार्टी में काम करने की एक प्रक्रिया होती है. इसे विश्वासघात कहा जाएगा.”

इस बीच पशुपति पारस के नेतृत्व वाली धड़े ने मंगलवार को चिराग पासवान को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया है.

चिराग के पिता और पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के सबसे छोटे भाई पशुपति पारस को लोकसभा सचिवालय द्वारा सदन में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के नेता के रूप में मान्यता दिए जाने के एक दिन बाद दोनों गुट पार्टी पर नियंत्रण करने के लिए तेजी से आगे बढ़े.

इधर चिराग पासवान को संसदीय दल में अलग-थलग कर दिया गया है क्योंकि उनके अलावा अन्य सभी सांसदों ने पशुपति पारस का समर्थन किया है, सूत्रों ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि उनके द्वारा संगठन के अन्य नेताओं से समर्थन प्राप्त करना जारी है.

मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंचने की संभावना है क्योंकि दोनों गुटों ने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है।

विद्रोह का कारण क्या हुआ?

पारस ने कहा कि पार्टी के 99% कार्यकर्ता और नेता चिराग पासवान की कार्यशैली के खिलाफ थे और वे पिछले छह महीनों से कोशिश कर रहे थे कि पार्टी को बट्टे खाते में डालने से बचाया जा सके. पारस ने यह भी कहा कि उन्हें अपने (पारस) नेतृत्व में पार्टी में अपने भतीजे का स्वागत करने में कोई आपत्ति नहीं है।

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उन्होंने खेद व्यक्त किया कि चिराग ने पिछले साल के बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी के नेताओं की सलाह को नजरअंदाज किया और सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लोजपा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. निर्विरोध के लिए, केवल एक उम्मीदवार राजकुमार सिंह ने चुनाव जीता और वह भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाइटेड) में भी शामिल हो गए.

“हमारी पार्टी में 6 सांसद हैं. पार्टी को बचाने के लिए हम 5 सांसदों की इच्छा थी. इसलिए, मैंने पार्टी को नहीं तोड़ा है, मैंने इसे बचाया है. चिराग पासवान मेरे भतीजे होने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. मैं उसके खिलाफ कोई आपत्ति नहीं है,” पारस ने कहा. उन्होंने कहा, “5 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है, जब भी वह आदेश देंगे, हम उनसे मिलने जाएंगे.”

पिछले साल बोए थे बगावत के बीज

एक चैनल के मुताबिक, पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच अलगाव होना तय था क्योंकि दोनों के बीच मुश्किल से ही बात होती थी. वे आपस में पत्रों के माध्यम से संवाद करते थे. रामविलास पासवान के मैन माने जाने वाले पशुपति पारस चिराग के पार्टी की कमान संभालने से नाराज हो गए थे. कथित तौर पर, पारस ने अपने भतीजे के बिहार विधानसभा चुनाव अलग से लड़ने के फैसले को मंजूरी नहीं दी थी.

आपके चाचा अब से आपके लिए मर चुके हैं – पारस

इसके अलावा, नवंबर 2020 के चुनावों से कुछ ही हफ्तों पहले पशुपति पारस द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए एक टिप्पणी ने भी चिराग पासवान को नाराज कर दिया था. टिप्पणी के बाद,चिराग पासवान ने अपने चाचा को पार्टी से निकालने की धमकी दी थी और कथित तौर पर कहा था “आप मेरे खून नहीं हो.” इसपर नाराज होकर पशुपति पारस ने चिराग को जवाब दिया था, “आपके चाचा अब से आपके लिए मर चुके हैं.”

सूत्रों ने बताया कि की लोजपा नेता भी स्पष्ट रूप से “जिद्दी, अभिमानी और मुश्किल से मिलने वाले” चिराग पासवान के पक्ष में नहीं थे. उन्होंने कहा कि कई लोगों ने पशुपति पारस की कार्यशैली को दिवंगत लोजपा संस्थापक के समान पाया.