चिराग पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष के घर, पारस मामले पर पुनर्विचार का किया आग्रह

नई दिल्ली / पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान और उनके नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी के गुट के कुछ अन्य नेता शनिवार रात को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचे. वहां उन्होंने लोजपा के बागी गुट द्वारा पटना में अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से बात की.

बैठक के बाद, चिराग ने मीडिया को संबोधित किया और कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को सभी तथ्यों से अवगत करा दिया है और उनसे एक निलंबित सांसद को लोजपा के नेता के रूप में स्वीकार करने के अपने फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है. गौरतलब है कि शुक्रवार को लोजपा के बागी गुट ने पशुपति कुमार पारस को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना है.

बता दें कि पशुपति कुमार पारस को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने के फैसले का विरोध करते हुए, चिराग पासवान ने पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र लिखा था. इसमें चिराग ने कहा था कि उन्हें उनकी पार्टी के संविधान के बारे में पता नहीं था और इसलिए पहले उन्होंने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को संसदीय दल का नेता घोषित किया.

लोकसभा अध्यक्ष ने पुनर्विचार का आश्वासन दिया: चिराग

चिराग ने बताया कि उनके (चिराग के) द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को लोजपा संविधान के बारे में बताया गया. में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विधानसभा/संसद में होने वाले किसी भी बदलाव को केंद्रीय संसदीय बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए.

चिराग के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुना और उनके द्वारा सामने रखे गए नए तथ्यों के आलोक में निर्णय पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया.

लोकसभा अध्यक्ष ने पारस के चुनाव को सही ठहराया

लोजपा में चल रही संवैधानिक-असंवैधानिक बहस पर विराम लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि संसद किसी राजनीतिक दल के संविधान से नहीं चलती.

आप यह भी पढ़ेंपति ले गया मार्केट, वहां से पत्नी भागी अपने बॉयफ्रेंड के साथ

उन्होंने कहा कि संसदीय दल का नेता चुनना राजनीतिक दलों का आंतरिक मामला है. यदि कोई पार्टी संसदीय दल के नेता को चुनने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करती है और मुख्य सचेतक एक पत्र प्रस्तुत करता है, तो निर्णय दर्ज किया जाना है. निर्णय (पशुपति कुमार पारस को लोजपा के संसदीय दल के रूप में दर्ज करने का) उचित था क्योंकि इसमें पांच सांसदों के हस्ताक्षर और मुख्य सचेतक का पत्र था.

आप यह भी पढ़ें बिहार का ऐतिहासिक देववरूणार्क सूर्यमंदिर बदहाल स्थिति में

इस मामले पर निर्णय पर पुनर्विचार करने के बारे में पूछे जाने पर बिड़ला ने कहा कि उन्होंने (चिराग पासवान) राष्ट्रीय अध्यक्ष होने का दावा करते हुए एक पत्र सौंपा. उन्होंने अपनी पार्टी के संविधान के बारे में अपनी बातों का उल्लेख किया. बिड़ला ने कहा कि, ‘मैं स्पष्ट कर दूं कि संसद किसी पार्टी के संविधान पर नहीं चलती है’.