निर्विरोध चुने गए बीजेपी प्रत्याशी सुशील कुमार मोदी

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी 7 दिसंबर को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए. अक्टूबर में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी. सोमवार को ट्वीट के माध्यम से सुशील मोदी ने अपने निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र शेयर किया.

राज्यसभा सदस्य का यह पद रामविलस पासवान के निधन होने के कारण रिक्त हुआ था. स्व० पासवान का कार्यकाल 2024 तक था. इस कारण सुशील मोदी का भी कार्यकाल इसी दिन तक का होगा.

राज्यसभा के इस पद के लिए 14 दिसंबर को चुनाव होना था, लेकिन चूंकि विपक्ष के किसी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया था, इसलिए सुशील मोदी निर्विरोध चुन लिए गए थे. उनके चुनाव को एक औपचारिकता माना जा रहा था क्योंकि हाल ही में संपन्न चुनावों में राजग (NDA) को विधानसभा में बहुमत मिला था. सुशील कुमार मोदी को मंत्रिपरिषद के अगले विस्तार में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है.

बता दें कि राज्यसभा की इस सीट पर उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रत्याशी सुशील मोदी के अलावे एक और, निर्दलीय प्रत्याशी श्याम नंदन प्रसाद ने नामांकन भरा था. लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी श्याम नंदन प्रसाद के नामांकन पत्र में एक भी प्रस्तावक का नाम/हस्ताक्षर अंकित नहीं रहने के कारण उनका नामांकन अवैध कर दिया गया.

इस तरह एकमात्र प्रत्याशी के रूप में सुशील मोदी का नामांकन पत्र ही वैध पाया गया. आज 7 दिसम्बर को नाम वापसी की अंतिम तिथि के अपराह्न तीन बजे की समाप्ति के बाद बीजेपी प्रत्याशी सुशील मोदी को निर्वाची पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त पटना संजय कुमार अग्रवाल द्वारा निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया.

इस कारण बीजेपी के एकमात्र और बिहार के तीसरे नेता सुशील मोदी

सुशील कुमार मोदी अब बिहार बीजेपी के एकमात्र ऐसे नेता बन गए हैं जो चार सदनों – बिहार विधान सभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. वैसे बिहार से वे तीसरे ऐसा नेता हैं जो चारों सदनों के सदस्य रहे हैं. इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं.

लालू प्रसाद यादव 1977 में पहली बार लोकसभा सांसद बने और 1980 में बिहार विधान सभा के लिए चुने गए. 1990 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने और 2002 में राज्यसभा सांसद बने.

इसी तरह, पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि 1977 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने और 1995 में राज्यसभा सांसद बने. वे 1999 में लोकसभा के लिए चुने गए और 2006 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने.

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वहीं, सुशील कुमार मोदी 1990 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में चुने गए थे. भागलपुर से जीतने के बाद 2004 में वे लोकसभा के सदस्य बने. 2005 और 2020 के बीच, वह बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. अब, वह राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं.

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