खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का किया स्वागत

पटना (TBN डेस्क) | केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की घोषणा का बिहार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि भारत सरकार द्वारा खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य 50 से लेकर 83 प्रतिशत तक बढ़ाने के फैसले से किसानों में खुशी की लहर फैल गई है.

प्रेम कुमार ने बताया कि केंद्र के इस फैसले से बिहार के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. साथ ही, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण प्राप्त करने वाले किसानों को उसके भुगतान करने की अवधि भी बढ़ाने की घोषणा का उन्होंने स्वागत किया. इसके लिए मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी को बधाई दिया.

मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के कारण हुए लॉकडाउन में भी पीएम मोदी ने गरीब और किसानों को प्राथमिकता में रखा है तथा उनके लिए की बड़े फैसले लिए हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य को फसल की लागत से डेढ़ गुना से भी ज्यादा देने की घोषणा की गई है. इसी के तहत 14 खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है.

प्रेम कुमार ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से किसानों को लागत का 50 से 83 प्रतिशत अधिक भाव मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,815 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1,868 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

उन्होंने बढ़े समर्थन मूल्यों के बारे में बताते हुए कहा कि मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,760 रूपये से बढ़ाकर 1,850 रूपये प्रति क्विंटल; अरहर एवं उरद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,800 रूपये तथा 5,700 रूपये से बढ़ाकर क्रमशः 6,000-6,000 रूपये प्रति क्विंटल; ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,550 रूपये से बढ़ाकर 2,620 रूपये प्रति क्विंटल, बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,000 रूपये से बढ़ाकर 2,150 रूपये प्रति क्विंटल और रागी, मूँग, मूँगफली, सोयाबीन और तिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है.

प्रेम कुमार ने बताया कि खेती या उससे जुड़े कार्यों के लिए 3 लाख रूपये तक के कर्ज के भुगतान की तारीख 31 मार्च से बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी गई है. इस कारण किसानों को बहुत फायदा होगा. कर्ज भुगतान के इस फैसले से किसानों के लिए कृषि कर्ज की ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत रह जायेगी.

अंत में मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी का फिर से आभार व्यक्त करते हुए खुशी जाहिर की और कहा कि कंदर के इस फैसले से किसान भाइयों एवं बहनों को खेती करने में काफी सहूलियत होगी.