बिहार के कृषि उत्पादक संघों व अन्य उद्योगों को मिलेगी सहायता

पटना (TBN रिपोर्ट) |  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किये गये 20 लाख करोड़ के पैकेज की तीसरी किश्त के तहत 11 ऐलान किये गये जिसमें से 8 किसानों के लिए थे. इसके बारे में बात करते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा है कि भारत की आत्मा आज भी गांवों में बसती है और खेती-किसानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

खेती-किसानी के विकास से ही भारत आत्मनिर्भर बन सकता है. केंद्र सरकार इस बात को अच्छे से समझती है इसीलिए प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से ही किसानों की आय बढाने के लिए लगातार उपाए किये जा रहे हैं.

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि किसानों के प्रति केंद्र सरकार का यही प्रेम हालिया घोषित आत्मनिर्भर भारत पैकेज में साफ़ दिखायी पड़ रहा है. बीते दिनों 20 लाख करोड़ के इस पैकेज की तीसरी किश्त के तहत 11 ऐलान किये गये.

हजारों करोड़ के इस पैकेज से किसान अपने उत्पादों की मिलने वाली कीमत के बारे में आश्वस्त हो सकेंगे वहीं फसलों के ट्रांसपोर्टेशन और भंडारण में दी गयी 50% सब्सिडी से उनकी लागत भी घटेगी, जिससे उनके मुनाफे में बढ़ोतरी होगी.

राजीव रंजन ने कहा कि पैकेज में माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के फॉर्मलाइजेशन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने का ऐलान किया गया है, जिसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों के उत्पादों को ब्रांड बनाया जाएगा. इसमें बिहार का मखाना, मिर्चा, चूड़ा आदि उत्पाद भी शामिल हैं.

सरकार की यह अकेली घोषणा ही बिहार के इन उत्पादनों और इसके व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों की किस्मत बदलने वाली है. देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब बिहार के चूड़ा, मखाना जैसे उत्पादों को इतनी तरजीह दी गयी है. पूरे देश में लगभग 2 लाख खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को इसका लाभ मिलेगा. इसके अतिरिक्त कृषि आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाने की भी घोषणा की गयी है, जिससे बिहार के कृषि उत्पादक संघों और कृषि आधारित अन्य उद्योगों को काफी सहायता मिलेगी.

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने आगे कहा पिछले दो महीने में केंद्र सरकार ने किसानों के लिए कई कदम उठाए हैं. पीएम किसान सम्मान के तहत पिछले दो महीने में किसानों के खाते में 18 हजार 700 करोड़ रुपये पहुंचाए गए.

लॉकडाउन के दौरान देश भर में 5600 लाख लीटर दूध कॉपरेटिव संस्थाओं ने खरीदा. दूध उत्पादकों के हाथों में 4100 करोड़ रुपए की रकम पहुंची. उन्होंने बताया कि कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ करोड़ रुपए दिए जाएंगे. इससे कोल्ड चेन, फसल कटाई के बाद प्रबंधन की सुविधाएं मिलेंगी जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी.