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कल है बसंत पंचमी, जानिए मां सरस्वती के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा

इस वर्ष बसंत पंचमी 5 फरवरी शनिवार को मनाई जाएगी. इस दिन ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना की जाती है. मान्यता के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती का जन्म हुआ था. हिंदुओं के हर व्रत और त्योहार की तरह बसंत पंचमी के पीछे भी एक पौराणिक कथा (Mythology related to the birth of Maa Saraswati) है. आइए जानते है इस कथा को.

बसंत ऋतु (Spring Season) को बहुत शुभ माना गया है. पतझड़ के बाद बसंत ऋतु आती है. भगवान कृष्ण (Lord Krishna) ने स्वयं कहा है कि ऋतुओं में मैं बसंत हूं. बसंत में मौसम सामान्य होने लगता है. सर्द हवाओं के तेवर कमजोर पड़ने लगते हैं. साफ शब्दों में समझें तो बंसत ऋतु में ना तो ज्यादा सर्दी होती है और ना ही गर्मी. इसलिए बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है.

मां सरस्वती की पौराणिक कथा

मान्यता है कि भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की आज्ञा से ब्रह्मा जी (Brahma ji) ने सृष्टि का प्रारंभ किया और मनुष्य की रचना की, लेकिन वे अपने सर्जन से संतुष्ट नहीं थे. उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है. इसके बाद विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा जी ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. जैसे ही जल की छीटें पृथ्वी पर बिखरीं तो उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ. यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी.

देवी ने बजाया वीणा

ब्रह्माजी ने देवी से वीणा (Veena) बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई. संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई. तब ब्रह्मा जी ने उन्हें वाणी की देवी सरस्वती कहा. मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं. बसंत पंचमी के दिन वे प्रकट हुईं थीं, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है. मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है.

(इनपुट-एटी)