अहमदाबाद में फंसे बिहार के लोगों की भूखों मरने की आयी नौबत

पटना (TBN रिपोर्ट) :- बिहार के लाखों लोग बाहरी राज्यों में रहकर नौकरी कर रहे हैं. ऐसे में देश में जब से कोरोना से बचाव के लिए  लॉकडाउन घोषित किया गया है. तब से परदेस में रह रहे लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

बिहार के करीब 200 लोग लॉकडाउन के चलते अहमदाबाद के सौरभ कंपाउंड में दाने-दाने को मोहताज हो चुके हैं. कंपनी ने वेतन भी नहीं दिया. अब 15 दिन से सरकारी संस्थाएं उन तक खाना भी नहीं पहुंचा रही हैं. बिहारियों ने बताया कि जो बचे हुए रुपये थे, अब वह भी खत्म हो गए हैं. सभी बिहार सरकार से उन्हें घर बुलाने या फिर भोजन का प्रबंध कराने की गुहार लगा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई दूसरे राज्य में फंसे बिहारवासियों की मदद के लिए आगे आएगा. हालांकि अब केंद्र ने परदेस में फंसे लोगों के लिए शर्तों के साथ घर बापसी का रास्ता खोल दिया है.

अहमदाबाद के सौरभ कंपाउंड में फंसे लोगों ने बताया कि वे गुजरात में प्लास्टिक तैयार करने वाली कंपनी में काम करते हैं. उनके चार बच्चे हैं. मोहल्ले में मुंगेर, छपरा, बांका, भागलपुर, आरा सहित एक दर्जन अन्य जिलों के लोग किसी तरह से मज़बूरी में अपना समय काट रहे हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण के पांव पसारने के बाद लॉकडाउन में कंपनी ने मार्च का वेतन भी नहीं दिया है. जिसकी वजह से सभी को पैसे की तंगी का सामना करना पड़ रहा है.

सौरभ कंपाउंड में फंसे लोगों ने बताया कि कंपनी लॉकडाउन शुरू होने के बाद 20 दिन तक सुबह-शाम खाना दे रही थी, लेकिन अन्य जरूरत हम खुद पूरा कर रहे थे. आलम ये है कि अब 15 दिन से कंपनी खाना नहीं भेज रही है. बस शुक्र इतना है कि मकान मालिक किराया नहीं ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास जितने भी पैसे थे, सब खत्म हो चुके हैं. पिछले दो दिन से बच्चों को दूध भी नहीं मिल पा रहा है. लोगों ने बताया कि अहमदाबाद में लॉकडाउन की वजह से मुंगेर, बांका, भागलपुर, गया, छपरा, आरा सहित बिहार के अन्य जिलों के लोग फंसे हैं. वेतन न मिलने की वजह से जेब में एक कौड़ी भी नहीं बची है. ऐसे में सभी लोगों ने बिहार सरकार से वापस घर बुलाने के लिए मदद की गुहार लगाई है।

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