18 अक्टूबर को तेजस्वी की पेशी! क्या होगा बिहार में इसके पहले और उसके बाद?

पटना (TBN – अनुभव सिन्हा)| बिहार विधान सभा में राजद (RJD) सबसे बड़ी पार्टी है. सत्ता में होने के नाते फिर से उसकी तूती बोलने लगी है. लेकिन रुकिए ! पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव (RJD National President Lalu Yadav) इतने डरे हुए क्यों हैं? राजद का वजूद खत्म होने का डर और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को सीएम बनाने की हड़बड़ी में क्यों हैं लालू यादव? क्या अब जाकर लालू यादव को नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) का ‘खेल’ समझ में आया ? क्या कर पायेंगे लालू?

लालू यादव को अभी सिर्फ एक उपाय सूझ रहा है. लालू को लगता है उस उपाय से तेजस्वी यादव की गिरफ्तारी को रोका जा सकता है. और, उपाय यह है कि किसी भी सूरत में 18 अक्टूबर के पहले तेजस्वी यादव के नाम के आगे मुख्यमंत्री शब्द जुड़ जाए. क्योंकि तब तेजस्वी को गिरफ्तार करने में सीबीआई को दिक्कत होगी.

लालू का डर सिर्फ तेजस्वी यादव की गिरफ्तारी ही नहीं है. इससे थोड़ा बड़ा डर है खुद की, राबड़ी देवी और मीसा भारती की गिरफ्तारी का और अंत में जो सबसे बड़ा डर है, वह है राजद के वजूद के खत्म हो जाने का. क्योंकि तब लालू से सत्ता और राजनीति की हनक दोनों ही छिन जायेगी.

लालू का यह डर हाल ही में पैदा हुआ और तबसे रोज बढ़ता गया. नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी महागठबंधन सरकार ने पिछले 24 अगस्त को विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया था. पर उस दिन सुबह से ही एक काम और हो रहा था. लालू-तेजस्वी के बेहद करीबी 6 लोगों के आवास और कार्यालयों पर सीबीआई की छापेमारी चल रही थी. यह छापेमारी लालू के लिए जी का जंजाल तो थी लेकिन रही-सही कसर तेजस्वी यादव ने पूरी कर दी.

सीबीआई को धमकी

अगले दिन 25 अगस्त को राजद के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने सीबीआई को बड़े आक्रामक तरीके से धमकी दे दी. इसका परिणाम यह हुआ कि दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय में सीबीआई ने एक पीटीशन फाईल करते हुए कि पटना में वह अदालत के आदेशों का पालन करने में असमर्थ है क्योंकि अभियुक्त तेजस्वी यादव ने बड़ी धमकी दे दी है. सीबीआई ने अदालत से दिल्ली में ही पेशी और ट्रायल की गुहार भी लगाई है. इस पीटीशन से अदालत की त्यौरियां चढ़ गईं और अदालत तेजस्वी यादव को नोटिस जारी कर 28 सितम्बर तक जवाब मांग लिया. तेजस्वी यादव ने नोटिस का जवाब नहीं दिया. फलतः अदालत ने प्रोडक्शन वारंट जारी कर दिया.

18 अक्टूबर को तेजस्वी की पेशी है. अब लालू का दिमाग क्या खेल रचेगा, यह देखने वाली बात होगी. पर सीबीआई के पास सिर्फ 24 घंटे का समय होगा पटना से गिरफ्तार कर राउज एवेन्यू कोर्ट, दिल्ली में तेजस्वी को पेश करने के लिए !

सीबीआई ऐसा कर सकती है

अनुमान है कि खेल होगा. तेजस्वी यादव गिरफ्तार होंगे या खुद सरेण्डर करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा. पर, अदालत तेजस्वी की जमानत रद्द कर गिरफ्तार करने का हुक्म सुनाएगी या जमानत बरकरार रखेगी, यह फैसला अदालत का है. लेकिन मामला तो सीबीआई को धमकी देने और अदालत की नोटिस का जवाब न देने का है. अदालत अपने फैसले में इस बात का ध्यान जरूर रखेगी. इसलिए ऐसा लगता है कि तेजस्वी यादव की गिरफ्तारी हो जायेगी.

इस बीच होम टर्फ यानी पटना में लालू का शातिर दिमाग कौन सी चाल चलकर तेजस्वी यादव को सीएम की कुर्सी पर बैठा देने में सफल होता है या नहीं, यह लालू के अलावा और कोई नहीं जानता. लालू को इसका पूरा तजुर्बा है, लेकिन कायदे से कुछ भी कहा नहीं जा सकता.

हो सकता है गड़बड़ झाला

लालू यादव की परेशानियां कई हैं. नीतीश के सीएम नहीं रहने की स्थिति में शायद ही जदयू का कोई विधायक होगा जो तेजस्वी को सीएम के रुप में स्वीकार करे. लालू यदि जदयू में तोड़-फोड़ की कोशिश करें, तो राजद में जाने के बजाय जदयू विधायक भाजपा में शामिल होना बेहतर समझेंगे.

लेकिन लालू अगर तेजस्वी को सीएम नहीं बना पाए तब नीतीश कुमार राजद का क्या करेंगे, लालू का यही डर सबसे बड़ा है. क्योंकि तेजस्वी की गिरफ्तारी के बाद राबड़ी देवी, मीसा भारती और खुद लालू की भी गिरफ्तारी तय है. यानी लालू का पूरा कुनबा जेल में होगा तब एक पार्टी के रुप में राजद की स्थिति के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है.

राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार लालू यादव सीबीआई के आने का इंतजार तो नहीं करेंगे ! कुछ-न-कुछ खेल वह करेंगे. पर इस बात की सम्भावना कम ही है कि सत्ता समीकरण में कोई बदलाव लाने में वह सफल हो जायेंगे. ऐसे में राजद में भी भगदड़ मच सकती है. लालू नीतीश कुमार का खेल बिगाड़ सकते हैं, विधानसभा भंग हो सकती है या फिर भाजपा की सत्ता में वापसी भी हो सकती है.

लेकिन इतना तय है कि 18 अक्टूबर के पहले कुछ ‘खास’ नहीं हुआ तब उसके बाद जो भी होगा, वह बड़ा राजनीतिक खेल होगा.