नीतीश सरकार के रवैये से नाराज शिक्षक संघ

पटना (TBN रिपोर्ट) :- बिहार सरकार की ओर से हड़ताली शिक्षकों की मांगों को लेकर और लिए जाने वाले फैसले को लेकर  24 अप्रैल को शिक्षा विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद सरकार ने नियोजित शिक्षकों को काम पर वापस आने के लिए अवसर दिया था. लेकिन नियोजित हड़ताली शिक्षकों ने सरकार की शर्तों पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद शिक्षकों को उम्मीद थी कि सरकार अपने स्तर पर समीक्षा बैठक के बाद शिक्षक संघों को बातचीत के लिए बुला सकती है लेकिन शिक्षकों की उम्मीद के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ. इतना वक़्त बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से बातचीत को लेकर कोई पहल नहीं की गयी. सरकार के इस तरह के रूखे रवैये से नाराज़  बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि, “नीतीश सरकार शर्म घोलकर पी गई है. सुप्रीम कोर्ट में समान काम समान वेतन के मुद्दे पर न्यायायिक लड़ाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि बिहार में शिक्षकों का वेतन चपरासी से भी कम है, लेकिन उसके बाद भी सरकार समान वेतनमान के मुद्दे को वाजिब नहीं मान रही है. शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि, “यह सरकार की हिटलर शाही का परिणाम है कि बिहार में नियोजित शिक्षक लगातार हड़ताल पर है और उनमें से कईयों की मौत हो चुकी है”.

बता दें बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के लगभग चार लाख नियोजित शिक्षक समान काम, समान वेतन के साथ सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. हड़ताल ख़त्म न करने की जिद पर अड़े हुए शिक्षकों के सामने अब भूखमरी जैसी समस्या आ गयी है. लेकिन अब भी शिक्षक हड़ताल को जारी रखे हुए हैं और हड़ताली शिक्षक पुराने शिक्षकों की तरह वेतनमान की मांग कर रहे हैं. हालांकि इस बीच बिहार सरकार के द्वारा हड़ताली शिक्षकों के सामने विभिन्न तरह के प्रस्ताव भी रखे गए हैं लेकिन शिक्षकों की ओर से सभी प्रस्ताव नकारे जा चुके हैं.