अपने मेडल्स के साथ सड़क पर उतरे बिहार के खिलाड़ी, जानिए वजह

Patna (TBN – The Bihar Now डेस्क) | मेजर ध्यानचंद जिन्हे हॉकी का जादूगर भी कहा जाता है उनके जन्मदिन 29 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सरकार की ओर से कई खिलाड़ियों को सम्मानित किये जाने और कुछ न कुछ नयी घोषणाएं करने की भी परंपरा है. परन्तु बिहार के खिलाड़ी सड़कों पर उतर आए हैं और अपने अधिकार मांग कर रहे हैं. दरअसल प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों की बदहाल स्थिति है. खिलाड़ियों की सरकारी नौकरियों में नियुक्ति 2015 से बंद है.

सरकार की इसी बेरुखी के विरोध में खेल दिवस पर राज्य के खिलाड़ियों ने राजधानी पटना में प्रदर्शन किया गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहे तक विरोध मार्च निकाला. आक्रोशित खिलाड़ियों ने अपने मेडलों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की.

बिहार प्लेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट था कि हर वर्ष सभी खेलों से पांच खिलाड़ियों को नौकरी देंगे, लेकिन 2014-15 में जितने भी खिलाड़ियों ने आवेदन दिया उनमें से आधे से अधिक को नौकरी नहीं मिली. नियुक्ति प्रक्रिया ही बंद है. ये जिन अधिकारियों ने किया है उन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

उन्होंने कहना है कि बिहार में खेलों और खिलाड़ियों की स्थिति काफी दयनीय है. अधिकारियों की वजह से नियुक्ति बंद है. अधिकारी मौज कर रहे हैं और खिलाड़ी सड़कों पर हैं. आखिर भूखे पेट खिलाड़ी मेडल कहां से लाएंगे. बिहार में खेल के साथ खिलवाड़ हो रहा है और ये सिर्फ अधिकारियों की वजह से है.
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं खिलाड़ियों को नौकरी देंगे तो 2014-15 की नियुक्ति क्यों बंद है. आज खेल दिवस है सरकार आज फिर लम्बे चौड़े वादे करेगी. खिलाड़ियों को सिर्फ सम्मानित किया जाएगा पर उनके लिए कभी कुछ नहीं किया जाता है.

खिलाड़ियों में इन सबको लेकर काफी आक्रोश है और ये आक्रोश ही है कि खिलाड़ी अब मैदान में नहीं बल्कि अपने हक के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं. उनका धैर्य अब टूट रहा है. एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस खेल दिवस के अवसर पर खिलाड़ियों और खेलों का भला करने की अपील की है.