“बदला लो – बदल डालो” के साथ राज्य में शिक्षकों का विरोध जारी

सेवाशर्त पर भड़के शिक्षकों ने फेसबुक पर चलाया “सैल्फी विद पोस्टर” कैम्पेन
“बदला लो- बदल डालो” के साथ सूबे के शिक्षकों का विरोध जारी रहेगा
सहायक शिक्षक और राज्यकर्मी का दर्जा की कर रहे मांग
नया सेवाशर्त शिक्षकों के बंधुआगिरी को बहाल बनाये रखने का कानूनी जामा / जारी रहेगा विरोध
प्रखंड जिला और राज्यस्तर पर विरोध की तैयारी तेज
पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर सरकार बदलने का लेंगे संकल्प

पटना (TBN – the bihar now डेस्क) | बिहार सरकार द्वारा सूबे के नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए जारी सेवाशर्त पर शिक्षकों का विरोध जारी है. केबिनेट द्वारा पारित करने के बाद से ही शिक्षक सेवाशर्त पर अपनी आपत्ति दर्ज कर रहे हैं. टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षकों का कहना है कि सेवाशर्त में शिक्षकों के लिए ऐच्छिक स्थानान्तरण, फुलफ्रेज इपीएएफ, अर्जितावकाश, ग्रेच्युटी, बीमा, मेडिकल समेत उनकी महत्वपूर्ण मांगों को दरकिनार कर दिया गया है. गोपगुट ने कल से ही सेवाशर्त के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिरोध सप्ताह की घोषणा कर रखी है. इसी क्रम में अपना विरोध प्रकट करते हुए सूबे के टीइटी शिक्षकों ने आज फेसबुक पर “सैल्फी विद पोस्टर” कैम्पेन चलाया | कैंपेन में विभिन्न जिलों के हजारों शिक्षकों ने अपनी भागीदारी की.

टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा कि सूबे की सरकार ने टीइटी एसटीइटी शिक्षकों के भविष्य का गला रेत दिया है. जहां टीइटी उत्तीर्ण शिक्षकों को दूसरे राज्यों में सीधे सहायक शिक्षक पद पर बहाली की जाती है वहीं बिहार सरकार ने टीइटी शिक्षकों के साथ चरम भेदभाव कर रही है. प्रशिक्षित रहने के बावजूद शिक्षकों को दो वर्षों तक ग्रेड पे से वंचित रखनेवाली सरकार शिक्षकों के प्रौन्नति एवं पदौन्नति में पात्रता की अपरिहार्यता से पल्ला झाड़ रही है. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एवं शिक्षा अधिकार कानून को दरकिनार कर नये सेवाशर्त के जरिये ठेका अनुबंध की प्रणाली को बहाल रखने की साजिश तेज है. सूबे के टीइटी एसटीइटी शिक्षक सड़क से लेकर न्यायालय तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे.

संगठन के प्रदेश सचिव अमित कुमार, शाकिर इमाम, नाजिर हुसैन प्रदेश कोषाध्यक्ष संजीत पटेल ने कहा कि नये सेवाशर्त में जहां ऐच्छिक स्थानान्तरण का लाभ शिक्षिकाओं एवं विकलांगों के लिए महज एकबार रखा गया है वहीं म्युचअल स्थानान्तरण के नाम पर शिक्षकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है. अर्जितावकाश भी राज्यकर्मियों को तीन सौ दिनों का मिलता है वही नियोजित शिक्षकों को महज 120 दिनों का दिया गया है.

केंद्र सरकार द्वारा लाये गये इपीएफ संशोधन कानून के आलोक में मूल वेतन पर इपीएफ कटौती के बजाय मिनिमम वेज पर इपीएफ की कटौती करते हुए नियोजित शिक्षकों को देय इपीएफ के पर भी कतर दिये गये हैं. अनुकंपा के नाम पर आश्रितों के लिए मस्टररॉल टाइप अनुसेवी और विद्यालय सहायक जैसे मानदेयी पद गढ़े गये हैं जिनसे एक परिवार का मिनिमम गुजारा संभव नही. सेवाशर्त में ग्रेच्युटी बीमा एवं मेडिकल आदि सुविधाओं का तो जिक्र तक नही है. प्रोन्नति एवं पदौन्नति जैसे मसले पर RTE और NCTE के प्रावधानों की खुली धज्जियां उड़ाकर शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है. डीए में कटौती करते हुए 01 अप्रैल 2021 से 15% वेतनवृद्धि का लालीपाप दिखाया जा रहा है. जबकि सुप्रीमकोर्ट ने पिछले साल ही टीइटी शिक्षकों के लिए बेटर पे स्कैल का सुझाव दिया है. यह सेवाशर्त सर्वोच्च न्यायालय के वेतन संबंधी न्यायिक सुझावों का भी निषेध कर रही है. यह नया सेवाशर्त शिक्षकों के बंधुआगिरी को बहाल बनाये रखने का ही कानूनी जामा है.

Advertisements