पटना सीरियल ब्लास्ट: 4 लोगों को फांसी, बाकियों को मिली ये सजा

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| पटना के गांधी मैदान (Gandhi Maidan Patna) में 8 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट (Patna Serial Bomb Blast) मामले में दोषी करार 9 लोगों को सजा सुना दी गई है. सोमवार को पटना स्थित एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने 4 लोगों को फांसी, 2 लोगों को आजीवन कारावास, दो को 10-10 साल की सजा और 1 को 7 साल की सजा सुनाई है.

बता दें, 27 अक्टूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली (Hunkar Rally) के दौरान सिर्फ 12 मिनट के अंदर 6 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. उस समय नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी की ओर से राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे. उस दिन रैली के अलावा पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 10 पर भी एक धमाका हुआ था. इसमें छह लोग मारे गए थे जबकि 80 से अधिक लोग जख्मी हुए थे.

इस सीरियल ब्लास्ट में 27 अक्टूबर 2013 को गांधी मैदान थाना में पुलिस केस दर्ज हुआ. फिर 31 अक्टूबर, 2013 को एनआईए ने इस केस को संभाला. उसके बाद एक नवंबर को दिल्ली स्थित एनआईए थाने में इसकी फिर से एफआईआर दर्ज की गई.

इस केस में 12 आरोपियों के खिलाफ चार्ज-शीट दायर किया गया था. इनमें से एक की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई थी जबकि एक नाबालिक आरोपी को जुवेनाइल बोर्ड ने पहले ही तीन वर्ष की कैद की सजा सुना दी है. इस मामले में अब तक कोर्ट में 187 लोगों की सुनवाई हो चुकी है.

एनआईए (NIA) कोर्ट के विशेष न्यायधीश गुरविंदर मल्होत्रा ने हैदर अली, नोमान अंसारी, मुजीब उल्लाह अंसारी, इम्तियाज आलम, अहमद हुसैन, फिरोज असलम, इम्तियाज अंसारी, इफ्तेखार आलम और अगर उद्दीन कुरैशी को दोषी करार दिया था. जबकि मो फखरुद्दीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था. उस दिन 1 नवंबर को सजा सुनने की तारीख मुकरर्र की गई थी.

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सोमवार को NIA कोर्ट के विशेष न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मलहोत्रा ने हैदर अली, नोमान अंसारी, मो. मुजिबुल्लाह अंसारी, इम्तियाज आलम को फांसी की सजा सुनाई है जबकि उमर सिद्दीकी और अजहरुद्दीन कुरैशी को उम्रकैद की सजा हुई है. मामले के अन्य आरोपी अहमद हुसैनस और मो. फिरोज असलम को 10-10 साल और इफ्तिखार आलम को 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई है.

बताते चलें, पटना सीरियल ब्लास्ट के 8 साल बाद फैसला सुनकर ब्लास्ट मृतकों के परिजनों ने कहा कि अब शांति मिली है. लेकिन अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हो सका है कि हुंकार रैली को असफल बनाने के लिए आतंकियों को फंडिंग कहां से की गई थी.