जमीन पर रखा चूड़ा खाने को मजबूर प्रवासी मजदूर

समस्तीपुर (TBN रिपोर्ट) | वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19) के चलते लॉकडाउन की अवधि को 31 मई तक बढ़ा दिया गया. इसको देखते हुए बिहार के बाहरी राज्यों में फंसे हुए लोगों के वापस लौटने का सिलसिला लगातार जारी है.

इस दौरान तमाम तरह की परेशानियों का सामना करके ट्रेन से लौट रहे मजदूरों के लिए भोजन और पानी की उचित व्यवस्था समेत उनकी जांच कराये जाने सम्बन्धी, बिहार सरकार के सारे दावों की पोल खुलती सी नज़र आयी जब समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर फर्स पर रखा मुट्ठी भर चूड़ा लेने के लिए टूट पड़े प्रवासी मजदूर जमीन पर रखा चूड़ा खाने को मजबूर हो गए.   

नीतीश सरकार के प्रवासियों को लेकर किये गए इंतज़ामों के सारे दावे खोखले साबित हो गए जब समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों से आए भूखे प्यासे प्रवासी मजदूरों ने भोजन और पानी जैसी कुव्यवस्था को लेेकर जमकर हंगामा किया. मजदूरों को जिला प्रशासन की ओर से सूखा चूड़ा उपलब्ध कराया गया वहीँ पानी केे लिए लोग तरसते रहे . इसके साथ ही मजदूरों को स्टेशन सेे घर भेजने के लिए वाहन की  व्यवस्था भी नहीं की गई थी

जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार की कुव्यवस्था को देखकर प्रवासी मजदूरों का आक्रोश भड़क गया और उन्होंने स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया. इसके साथ ही भूख और प्यास से तड़पते कुछ मजदूर भोजन और पानी के लिए स्टेशन से निकल बाजार में चले गए . स्टेशन पर मौजूद मजदूरों का कहना था कि दूसरे प्रदेशों से लौटने के दौरान वहां की सरकार के द्वारा उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराया गया लेकिन यहां अपने ही प्रदेश में उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई यहाँ तक कि भोजन भी फेंक कर दिया गया . जिसको लेकर अफरा तफरी का माहौल  बन गया . इसके साथ ही इन मजदूरों का कहना था कि वह कोरोना से मरे या न मरे लेकिन भूख और प्यास से वह जरूर मर जाएंगे.

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर सरकार की बदइंतजामी की हालात बयान करती ये तस्वीर नीतीश सरकार की कार्यप्रणाली एवं उचित व्यवस्था के दावों को लेकर सैंकड़ों सवाल खड़ा करती है.