पटना में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ कोरोना की भी दी गई आहुति

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| हर साल राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान (Gandhi Maidan) में दशहरा कमिटी की तरफ से इसका आयोजन किया जाता है. इस साल कोविड 19 की वजह से गांधी मैदान में रावण वध का कार्यक्रम का आयोजन स्थगित नहीं हुआ, लेकिन इसका आयोजन कालिदास रंगालय में किया गया.

बता दें, राजधानी पटना में हर साल विजयदशमी के दिन रावण वध का कार्यक्रम होता है. पहली बार 1955 में गांधी मैदान में ही रावण वध कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कोरोना की वजह से इसका आयोजन पिछले साल नहीं हो पाया था. इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण यह कार्यक्रम बड़े लेवल पर आयोजित नहीं किया गया. हालांकि प्रतीक के तौर पर वायरस के खत्म होने के लिए इस बार रावण दहन का कार्यक्रम किया गया.

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी मौजूद थे. उन्होंने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की. इस कार्यक्रम के शुरुआत में सबसे पहले मेघनाथ के पुतले को जलाया गया, उसके बाद कुंभकरण को आग लगाई गई और अंत में बुराई का प्रतीक रावण को जलाया गया. साथ ही इस बार कोरोना का भी एक छोटा पुतला जलाया गया.

इस बार पांच से छह गुना छोटा पुतला

गांधी मैदान में होने वाले रावण वध के आयोजन में रावण का पुतला लगभग 90 फीट, कुंभकर्ण का 80 फीट और मेघनाद का पुतला 70 फीट ऊंचा बनाया जाता था. लेकिन इस बार रावण का पुतला 15 फीट, कुंभकर्ण 13 फीट और मेघनाद का 12 फीट ऊंचा पुतला बनाया गया. साथ ही कोरोना वायरस का भी एक पुतला बनाया गया जिसका साइज 10 फीट था.

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कालिदास रंगालय के छोटे से मैदान में आयोजित इस रावण वध कार्यक्रम में दर्शकों को जाने की इजाजत नहीं थी. यहां सिर्फ दशहरा कमिटी के लोग और कलाकारों ने भाग लिया.

दशहरा कमेटी के अध्यक्ष कमल नोपानी ने मीडिया को बताया कि 66 वर्षों से हमारी ट्रस्ट गांधी मैदान में लगातार आयोजन करती आई है. इस बार कोविड के चलते छोटे रूप में आयोजन किया गया. नोपानी ने कहा कि कोरोना के कारण लोगों को काफी नुकसान हुआ है, इसीलिए प्रतीक के तौर पर वायरस के खत्म होने के लिए इसका दहन किया गया.

इस बार पुतला दहन के समय मीडियाकर्मियों के आलवे चुनिंदा पास धारक ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहें. कालिदास रंगालय में हुए इस आयोजन में सिर्फ 80 लोगों को रावण वध कार्यक्रम देखने के लिए बुलाया गया था.