शराबबंदी से सबसे ज्यादा परेशानी दलित समाज को – मांझी

मुजफ्फरपुर (TBN – The Bihar Now डेस्क)| राज्य में शराबबंदी (Prohibition Law) को लेकर एक बार फिर जीतन राम मांझी ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने मुजफ्फरपुर में कहा कि शराबबंदी कानून से सबसे ज्यादा परेशानी दलित समाज को हो रहा है. शराब पीने के कारण दलितों को जेल भेजा जा रहा है जबकि बड़े लोग आराम से अपने घरों में शराब पी रहे हैं.

सहयोगी दल ‘हम’ पार्टी के सुप्रीमो (HAM Supremo Jitan Ram Manjhi) ने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को कोई नहीं पकड़ता है जबकि गरीबों के घर में रात के 12 बजे भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज देती है. शराब पीने की वजह से 70 प्रतिशत गरीब लोग जेल में हैं.

उन्होंने कहा कि यहां बड़े लोग शराब लगातार पीते हैं लेकिन उन्हें पूछने वाला कोई नहीं है. उनको कुछ नहीं होता है. जबकि दलितों को आधा बोतल और एक बोतल शराब का सेवन करने पर जेल भेज दिया जा रहा है जो न्याय संगत नहीं है.

मांझी का कहना है कि जेल में कैदियों को रखने की जगह नहीं है. अब उनको कैंप जेल बनाना पड़ेगा. जीतन राम मांझी ने सुझाव दिया कि शराबबंदी के तहत जेल भेजे गए गरीबों को सरकार को रिहा कर देना चाहि क्योंकि 70 प्रतिशत गरीब जेल में बंद हैं.

हम सुप्रीमो ने कहा कि रात 10 बजे बाद शराब को दवा के रूप में थोड़ी-थोड़ी पीनी चाहिये. उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में शराब लेना गलत नहीं है

उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरात मॉडल की चर्चा की और कहा कि शराब पीना सार्वजनिक स्थलों पर बैन रहना चाहिये.

बता दें, जीतन राम मांझी ने दो दिन पहले बेतिया में कहा था कि शराबबंदी ठीक है, लेकिन इसमें दो तरह की नीति अपनाई जा रही है. उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि धनवान लोग एमपी, एमएलए, ठेकेदार, आईएएस, आईपीएस रात 10 बजे के बाद शराब का सेवन करते हैं.

बताते चले, हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किए गए विकास कार्यो की तारीफ करते हैं. लेकिन शराबबंदी कानून में संशोधन के लिए वह लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं. उनका कहना है कि नीतीश कुमार को शराबबंदी पर एक बार फिर से सोचना चाहिए.