Facebook का कॉर्पोरेट नाम अब हुआ Meta, कहीं ये कारण तो नहीं इसका !

वाशिंगटन / अमेरिका (TBN – The Bihar Now डेस्क)|: फेसबुक (Facebook) ने गुरुवार को अपना कॉर्पोरेट नाम बदलकर मेटा (Meta) कर लिया. हालाँकि, परिवर्तन केवल मूल कंपनी पर लागू होगा जबकि व्हाट्सएप (WhatsApp), फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) जैसे प्लेटफॉर्म के नाम वही रखेंगे.

इस बावत एक ब्रीफिंग में, कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने कहा कि मेटा, “मेटावर्स” नामक एक तकनीक को संदर्भित करता है – एक साझा किया हुआ आभासी वातावरण (shared virtual environment) जिसे विभिन्न उपकरणों का उपयोग करने वाले लोगों द्वारा एक्सेस किया जा सकता है.

जुकरबर्ग ने संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के कैलिफोर्निया (California) स्थित कंपनी के मुख्यालय में एक नए Logo का भी अनावरण किया, जिसमें थम्स-अप “लाइक” को नीले अनंत आकार के साथ बदल दिया गया था.

फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा ब्रांड “संभवतः हर उस चीज का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है जो हम आज कर रहे हैं, भविष्य में तो दूर की बात है”, और इसे बदलने की जरूरत है. जुकरबर्ग ने कहा, “अब से, हम पहले मेटावर्स होने जा रहे हैं, न कि पहले फेसबुक”.

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कंपनी द्वारा ब्रांड को फिर से शुरू करने का एक प्रयास प्रतीत होता है क्योंकि यह कई जनसंपर्क संकटों (public relations crises) का सामना कर रहा है. फेसबुक के पूर्व कर्मचारी से व्हिसलब्लोअर बने फ्रांसेस हॉगेन (Frances Haugen) ने कई दस्तावेजों को लीक किया और कंपनी पर “सुरक्षा पर लाभ” डालने का आरोप भी लगाया.

भारत में इस खुलासे ने फेसबुक को चुनावों को प्रभावित करने और अपने मंच पर अभद्र भाषा और गलत सूचना से निपटने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं करने के लिए संदेह के घेरे में ला दिया है. सोशल मीडिया कंपनी पर हाई-प्रोफाइल उपयोगकर्ताओं को सामग्री को मॉडरेट करने के उद्देश्य से अपने स्वयं के नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति देने का भी आरोप लगाया गया है.

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मैकडोनो स्कूल ऑफ बिजनेस (Georgetown University McDonough School of Business) के मार्केटिंग प्रोफेसर प्रशांत मालवीय (Prashant Malaviya) ने रॉयटर्स (Reuters) को बताया कि फेसबुक नाम को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की योजना से पता चलता है कि कंपनी अपने बाकी ऐप्स पर जांच को रोकना चाहती है. उन्होंने कहा कि बिना किसी शक के फेसबुक का नाम आज निश्चित रूप से क्षतिग्रस्त और विषाक्त है.

वहीं, मार्केटिंग कंसल्टेंट लॉरा रीस (Marketing consultant Laura Ries) ने बताया कि यह कदम ऊर्जा कंपनी बीपी (BP) की याद दिलाता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली आलोचना से बचने के लिए खुद को “बियॉन्ड पेट्रोलियम” (Beyond Petroleum) में बदल दिया था.

उन्होंने कहा, “फेसबुक दुनिया का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, और उन पर कुछ ऐसा बनाने का आरोप लगाया जा रहा है जो लोगों और समाज के लिए हानिकारक है. वे एक नए कॉर्पोरेट नाम के साथ सोशल नेटवर्क से दूर नहीं जा सकते हैं और भविष्य के मेटावर्स (Metaverse) की बात कर सकते हैं.”