लॉकडाउन में शराब की जबरदस्त बिक्री, पूर्वी चंपारण पहले पायदान पर, राजधानी दूसरे पर

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| जी हां, सच है ये. राज्य में शराबबंदी के बावजूद, कोरोना लॉकडाउन में शराब की बिक्री अपने पूरे शबाब पर रही. जून 2021 के आंकड़ों के अनुसार शराब की सबसे ज्यादा बरामदगी पूर्वी चंपारण में हुई जबकि पटना में उससे थोड़ा कम. यानि शराब की बिक्री के मामले में पूर्वी चंपारण पहले पायदान पर रहा जबकि राजधानी पटना पांचवें पर रहा.

5 अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से ही शराब तस्करी के खिलाफ उत्पाद विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में लगातार कार्रवाई जारी है. लेकिन आज राज्य में शराब के फलते फूलते कारोबार को देखकर यह लगता नहीं है कि यहां पूर्ण शराबबंदी है.

पूर्ण शराबबंदी में नीतीश सरकार अभी तक असफल

राज्य में शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है और विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का काम कर रही है. यहां शराब के लगातार बढ़ते अवैध कारोबार को देख जानकारों का कहना है कि पूर्ण शराबबंदी को रोक पाने में नीतीश सरकार अभी तक असफल रही है.

राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुए 5 साल से ज्यादा हो गए हैं लेकिन फिर भी यहां शराब का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इस बात की पुष्टि यहां से हो रही है कि सिर्फ जून महीने में यहां कुल 9269 जगहों पर छापेमारी की गयी और 1224 मामले दर्ज किए गये. 655 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया तथा 324 वाहनों को भी जब्त किया गया.

शराब बरामदगी में पूर्वी चंपारण सबसे ऊपर हैं जबकि दूसरे स्थान पर पटना, तीसरे पर औरंगाबाद, चौथे पर सीवान और पांचवे स्थान पर भागलपुर जिला है. गिरफ्तारियों के मामले पर पहले नंबर पर मुजफ्फरपुर जिला, दूसरे पर भोजपुर, तीसरे पर नवादा, चौथे स्थान पर राजधानी पटना और पांचवे स्थान पर सीतामढ़ी जिला है.

शराबबंदी लागू करवाना पुलिस के लिए मुश्किल साबित हो रहा

राज्य की पुलिस के लिए शराबबंदी को पूरी तरह से लागू करवाना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है. इसका कारण है, विधि व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अवैध बालू खनन को देखने की जिम्मेदारी. इसके अलावे भी पुलिस के पास कई और काम हैं. हालांकि पुलिस शराबबंदी के लिए छापेमारी कर रही है और शराब की बड़ी खेप भी पकड़ी जा रही है. शराब तस्करों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है.

सूचना देने हेतु टोल फ्री नंबर भी है जारी

शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सरकार ने 18003456268 और 15545 टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है जिस पर शराब से संबंधित जानकारी दी जा सकती है.

जानकारों का कहना है कि जब तक समाज तथा लोग जागरूक नहीं होंगे, शराबबंदी के सफलता की कल्पना भी बेमानी है. समाज में लोगों को शराब से होने वाले नुकसान के बारे में जानना होगा. उन्हें यह जानना होगा कि शराब हमारे जीवन, परिवार और समाज के लिए बहुत नुकसानदायक है. तभी शराबबंदी कानून सफल हो पाएगा.

कई बार पुलिस की शराब तस्करों से मिलीभगत

भले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा सकारात्मक कदम उठाए गए हैं लेकिन सोशल अवेयरनेंस नहीं होने से शराबबंदी कानून पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पा रहा है. यह भी सच है कि पुलिस की भी कई बार शराब तस्करों से मिलीभगत होती है, जिसके बहुत उदाहरण सामने आए हैं.

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बेरोजगारी ने भी युवाओं को शराब की तस्करी के धंधे से जुडने को बाध्य किया है. बेरोजगार युवा शराब की होम डेलीवरी में कमाई कर रहे हैं. वे शराबबंदी को समझने के लिए तैयार नहीं है. इतना ही नहीं, अवैध व जहरीली शराब के पीने से कई लोगों की जानें भी जा रही हैं.

जानकारों का कहना है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा बिना राय-विचार कर की गई है जिसका सीधा फायदा पड़ोसी राज्य उठा रहे हैं. शराब तस्करों द्वारा बिहार में अवैध शराब की बड़ी-बड़ी खेप हरियाणा, अरुणाचल, उड़ीसा, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड से मगाई जा रही है. हालांकि पुलिस भी कई बार इन खेपों को पकड़ने में सफल रही है.

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बताते चलें, बिहार में पूर्ण शराबबंदी होने के बावजूद इसकी होम डेलीवरी हो रही है, जिसके लिए विपक्ष हमेशा से सरकार को घेरता रहा है. दबी जुबान में बिहार के निवासी अब कहने लगे हैं कि राज्य में शराबबंदी असफल है.