SSR Case: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर 33 सेंटीमीटर गहरा निशान

Patna (TBN – The Bihar Now डेस्क) | अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. वहीं शनिवार काे सुशांत की 7 पेज की पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट सामने आई है. पांच डाॅक्टराें की टीम ने रिपाेर्ट लिखी है. रिपाेर्ट के अनुसार, सुशांत की गर्दन पर 33 सेंटीमीटर के गहरे निशान थे और उनकी जुबान बाहर नहीं हुई थी. दांत ठीक थे, शरीर पर काेई चाेट के निशान नहीं थे. रिपोर्ट के मुताबिक उनकी आंखाें की पलक आंशिक रूप से खुली थीं और शरीर के किसी भाग की हड्डी टूटी हुई नहीं थी.

रिपाेर्ट के अनुसार, मुंह या कान से से झाग या ब्लड नहीं निकल रहा था. सुशांत के सभी आंतरिक अंग सही थे. उनके गर्दन की गोलाई 49.5 सेंटीमीटर थी जबकि गले के नीचे 33 सेंटीमीटर का लंबा गहरा निशान था. रस्सी का निशान ठुड्डी से 8 सेंटीमीटर नीचे था. गले के दाहिनी तरफ निशान की मोटाई 1 सेंटीमीटर थी. गले की बांई तरफ निशान की मोटाई 3.5 सेंटीमीटर थी. इन सबके बीच सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह ने इस रिपाेर्ट पर फिर सवाल खड़ा कर दिया है.

रिपोर्ट में मौत का वक्त दर्ज क्यों नहीं ?

उनका कहना है कि रिपाेर्ट में उनके माैत का वक्त क्याें नहीं दर्ज है. यह रिपाेर्ट का सबसे अहम बिंदु हाेता है. उन्हाेंने माैत से पहले जूस और नारयिल का पानी पिया था पर सुशांत की पोस्टमार्टम रिपाेर्ट में उसका जिक्र नहीं है. वकील विकास सिंह का दावा है कि जूस और नारियल पानी ताे उनके पेट में हाेगा. उन्हाेंने कहा कि रिपाेर्ट में कई गड़बड़ियां हैं. सुशांत के कमरे में टूल या टेबल नहीं था ताे कैसे उन्हाेंने सुसाइड कर लिया.

एम्स के डॉक्टरों की मदद ले रही सीबीआई

इधर सीबीआई ने पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट की जांच करने और उसे परखने के लिए एम्स, दिल्ली की डाॅक्टराें की मदद ली है. सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर पाेसटमार्टम रिपाेर्ट में माैत के वक्त का जिक्र क्यों नहीं है. विकास सिंह ने कहा है कि सुशांत का पाेस्टमार्टम सही नहीं हुआ या फिर रिपाेर्ट सही नहीं लिखी गई. उन्होंने भरोसा जताया है कि सीबीआई की जांच में सब साफ हाे जाएगा.

कूपर अस्पताल पहुंची सीबीआई

जानकारी के मुताबिक सीबीआई की एक टीम ने शनिवार को मुंबई के कूपर अस्पताल का भी दौरा किया था. जहां दिवंगत एक्टर का पोस्टमार्टम हुआ था. टीम ने कूपर अस्पताल के डीन से मुलाकात की थी और कहा कि अधिकारी उन चिकित्सकों से भी मिलेंगे जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था.

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