सहरसा नाई संघ ने मनाई कर्पूरी ठाकुर की 34वीं पुण्यतिथि

सहरसा (TBN – The Bihar Now डेस्क)| गुरुवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की 34वीं पुण्यतिथि (Jannayak Karpoori Thakur’s 34th death anniversary) मनाई गई. इस अवसर पर सहरसा स्थित स्टेडियम के बाहरी परिसर मे नाई संघ (Barber Union) के द्वारा श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया. संघ के जिलाध्यक्ष विजेंदर ठाकुर की अध्यक्षता एवं सचिव शिवशंकर ठाकुर के संचालन में उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर नमन किया गया.

बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री

इस अवसर पर वैश्य समाज के जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद साह ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने अपने कुल ढ़ाई साल के मुख्यमंत्रीत्व काल में बिहार के समाज पर जिस तरह की छाप छोड़ी है, वैसा दूसरा उदाहरण नहीं दिखता. उन्होंने कहा कि ख़ास बात यह भी है कि कर्पूरी ठाकुर बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे.

अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया

वहीं, वैश्य समाज के प्रवक्ता राजीव रंजन साह ने कहा कि सामाजिक बदलावों की शुरुआत 1967 में हुई, जब पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर कर्पूरी ठाकुर ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया. इसके चलते उनकी खूब आलोचना भी हुई. लेकिन हक़ीक़त यह है कि उन्होंने शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाया.

चर्तुथवर्गीय कर्मचारियो के लिए लिफ्ट की सुविधा बहाल की

जिला उपाध्यक्ष विजय गुप्ता ने जननायक को नमन करते हुए कहा कि 1971 में मुख्यमंत्री बनने के बाद किसानों को बड़ी राहत देते हुए कर्पूरी ठाकुर ने गैर लाभकारी जमीन पर मालगुजारी टैक्स को बंद कर दिया. उस समय बिहार के मुख्यमंत्री सचिवालय की इमारत की लिफ्ट चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं थी. मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने चर्तुथवर्गीय कर्मचारियो के लिए लिफ्ट की सुविधा बहाल की.

श्रद्धांजलि समारोह में नाई संघ के महासचिव संजय कुमार ने कहा कि उस दौर में समाज में उन्हें कहीं अंतरजातीय विवाह की ख़बर मिलती तो उसमें वो पहुंच जाते थे. वो समाज में एक तरह का बदलाव चाहते थे. बिहार में जो आज दबे पिछड़ों को सत्ता में हिस्सेदारी मिली हुई है, उसकी भूमिका कर्पूरी ठाकुर ने बनाई थी.

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वहीं, नाई संघ के नेता राजेंद्र ठाकुर और गणेश ठाकुर ने कहा कि 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कर्पूरी ठाकुर ने मुंगेरीलाल कमीशन लागू किया. इसके चलते राज्य की नौकरियों में आरक्षण लागू किया जा सका. इसके कारण वह कुछ जातियों के हमेशा के लिए दुश्मन बन गए. लेकिन कर्पूरी ठाकुर समाज के दबे पिछड़ों के हितों के लिए काम करते रहे.

पवन ठाकुर, मुरली ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के सभी विभागों में हिंदी में काम करने को अनिवार्य बना दिया. इतना ही नहीं उन्होंने राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन आयोग को राज्य में भी लागू करने का काम सबसे पहले किया था.

(इनपुट-एजेंसी)