मधुबनी: वेब पत्रकार की ह’त्या, बोरे में मिला अधज’ला श’व

मधुबनी (TBN – The Bihar Now डेस्क)| नीतीश सरकार (Nitish Government) कानून के राज व सुशासन की चाहे जितनी भी डींगें हांक ले, लेकिन अपराधियों द्वारा दुस्साहस दिखाते हुए समूचे राज्य में आपराधिक तांडव दिखाया जा रहा है. पुलिस प्रशासन को ढेंगा दिखाते हुए अपराधियों ने एक और व्यक्ति की नृशंस ह’त्या कर दी है. इस बार एक वेब पत्रकार (Web Journalist) की ह’त्या की गई है.

बेनीपट्‌टी (Benipatti, Madhubani) के एक लोकल न्यूज पोर्टल के लिए काम करने वाले बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश झा (24) की ह’त्या कर दी गई है. बेनीपट्टी बाजार के लोहिया चौक निवासी दयानंद झा के पुत्र बुद्धिनाथ झा का अधज’ला श’व शुक्रवार रात बेनीपट्टी-बसैठ राजमार्ग संख्या-52 के पास उरेन गांव में एक पेड़ के नीचे मिला.

भाई का आरोप – अस्पताल संचालक ने कराई हत्या

अविनाश झा 9 नवंबर की रात से गायब था. उसके बड़े भाई चंद्रशेखर झा ने 11 नवंबर को बेनीपट्टी थाना में आवेदन देकर अपने छोटे भाई के ला’पता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके छोटे भाई अविनाश झा को एक गहरी साजिश के तहत बेनीपट्टी के ही एक स्थानीय अस्पताल माफिया ने गायब करवा दिया था.

चंद्रशेखर झा ने अपने आवेदन में लिखा था कि बुद्धिनाथ ने पिछले कई सालों से बेनीपट्टी में फर्जी तरीके से चलाए जाने वाले एक स्थानीय अस्पताल के खिलाफ खबर चलाई थी जिस कारण उस अस्पताल के लोग उससे नाखुश थे. चंद्रशेखर झा के अनुसार, इसी कारण उनलोगों ने उसके भाई की हत्या करवा दी है.

बेनीपट्टी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि मृतक के बड़े भाई चंद्रशेखर झा की ओर से 11 नवंबर को उसके लापता होने का आवेदन मिलने के साथ ही पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई थी. शुक्रवार की रात मृ’तक का श’व मिलने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है.

अंगूठी व कपड़े से हुई पहचान

पुलिस सूत्रों ने बताया है कि पो’स्टमॉ’र्टम रिपोर्ट के अनुसार मृ’तक पत्रकार अविनाश झा की मौ’त चार दिन पहले हो चुकी थी. उसका श’व शुक्रवार रात एक बोरी से बरामद हुई थी. परिजनों ने अंगूठी व कपड़ा से उसकी पहचान की.

थानाध्यक्ष के अनुसार, मामले में सभी बिंदुओं पर गौर करते हुए पुलिस शीघ्र अप’राधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस अविनाश झा के ह’त्यारों को जल्द ही गिरफ्तार कर लेगी.

मामला क्या है

बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश झा के बड़े भाई के मुताबिक, “पहले उसने एक क्लिनिक शुरू किया था जिसमें बाहर से आए डॉक्टर स्थानीय लोगों का इलाज करते थे. लेकिन स्थानीय नर्सिंग होम संचालकों ने उसे इतना परेशान किया कि उसे ये काम बंद करना पड़ा. इसके बाद इसने ठान लिया कि वो फ़र्ज़ी नर्सिंग होम के इस धंधे को ख़त्म करेगा.”

अविनाश झा पिछले तीन सालों से लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास अपने इलाके के नर्सिंग होम से जुड़ी शिकायतें भेज रहे थे. बिहार राज्य में 5 जून 2016 को लोक शिकायत निवारण अधिनियम लागू किया गया था. जिसका मकसद 60 कार्य दिवस के अंदर आम लोगों की शिकायतों की सुनवाई करना था. इसके अलावा वो सूचना के अधिकार का भी इस्तेमाल करते थे.

बेनीपट्टी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एसएन झा, जो बीते तीन साल से वहां पदस्थापित है, उन्होनें बताया, “बीते तीन सालों में अविनाश झा ने स्थानीय नर्सिंग होम और पैथलैब को लेकर लोक शिकायत निवारण के तहत बहुत शिकायतें की थीं. इन शिकायतों पर जांच के बाद नर्सिंग होम के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई.”

उनके इस तरह लगातार शिकायतों के चलते फरवरी 2021 बेनीपट्टी और धकजरी के 19 जांच घर और नर्सिंग होम को बंद करने का सरकारी आदेश हुआ. इसी तरह दिसंबर 2019 में हुई जांच में 9 नर्सिंग होम और पैथलैब को बंद करने का आदेश हुआ. अगस्त 2021 में सिविल सर्जन ने 4 निजी नर्सिंग होम पर 50 हज़ार का जुर्माना भी लगाया था.

अविनाश झा ने 7 नवंबर को अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा था, ‘द गेम विल रीस्टार्ट ऑन द डेट 15.11.2011’. उनका इशारा शायद नर्सिंग होम के खिलाफ कोई मुहिम छेड़ने की ओर था.

अविनाश के चचेरे भाई बीजे विकास ने बताया कि इस पोस्ट के बाद बुद्धिनाथ झा 9 नवंबर को लापता हो गया, हमने इसकी शिकायत अगले दिन दी और 11 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज हो गई. सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक वो रात 9 बजे से 9.58 बजे तक घर की गली के आगे पड़ने वाली मुख्य सड़क पर फोन पर बात करते दिख रहा है. वो आख़िरी बार रात दस बजकर दस मिनट पर बाज़ार में दिखा.

परेशान घरवालों ने अगले दिन बेनीपट्टी थाने में सूचना दे दी थी. पुलिस ने अविनाश झा के मोबाइल को ट्रेस किया तो लोकेशन बेनीपट्टी थाने से पांच किलोमीटर दूर बेतौना गांव में मिली.

10 नवंबर की सुबह 9 बजे के बाद उनका फ़ोन भी बंद हो गया. स्थानीय पुलिस ने उनकी अंतिम लोकेशन पर जाकर जानकारी ली लेकिन कुछ ठोस नहीं मिला.

बताते चलें, 24 वर्षीय मृ’तक वेब पत्रकार बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश झा एक आरटीआई (RTI) ऐक्टिविस्ट भी था. वह बेनीपट्टी में अपना एक जांच घर (Test Laboratory) भी चलाता था. आरटीआई कार्यकर्ता होने के कारण वह स्थानीय अस्पतालों से संबंधित सूचनाएं भी एकत्रित करता था. इस कारण वह अस्पताल माफिया की आँखों में खटकने लगा था. ऐसा माना जा रहा है कि अविनाश झा की ह’त्या अस्पताल माफिया द्वारा ही करवाया गया है. उसे जिंदा ज’लाकर मा’रा गया है.

मृ’तक पत्रकार का हुआ अंतिम संस्कार

मृ’तक युवा वेब पत्रकार बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश झा का श’व पोस्टमार्टम उसके परिजनों को सौंप दिया गया. उसके बाद मृ’तक का अंतिम सं’स्कार कर दिया गया.

बताते चलें, पिछले अगस्त महीने की 10 तारीख को मोतिहारी, पूर्वी चंपारण में एक पत्रकार मनीष कुमार सिंह को अगवा करने के बाद गला रेत कर ह’त्‍या कर दी गई थी. पुलिस उस मामले की भी जांच कर रही है.

बहरहाल, राज्य में फिर से एक वेब पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता की ह’त्या प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है. अपराधियों द्वारा एक पत्रकार को जिंदा ज’लाकर ह’त्या कर देने का यह दुस्साहस वाकई एक चिंताजनक विषय है. अब नीतीश सरकार द्वारा पत्रकारों के मारे जाने पर क्या कदम उठाया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी.