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अविश्वसनीय: दरभंगा में रातोंरात तालाब की हुई चोरी !

दरभंगा (TBN – The Bihar Now डेस्क)| यह अविश्वसनीय लग सकता है, लेकिन दरभंगा में विश्वविद्यालय थाना (Vishwavidyalaya Police Station, Darbhanga) क्षेत्र के कादिराबाद (Kadirabad) में रातों-रात एक तालाब की चोरी हो गई. जानकारी के अनुसार, इस इलाके के तालाब, जिसका नाम ‘नीम पोखर’ (Neem Pokhar) है, अचानक से गायब हो गया है. सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक (DSP) को इलाके में कोई तालाब नहीं मिला, जो एक दिन पहले वहां था.

पुलिस ने इस तालाब चोरी की जांच शुरू कर दी है. खबरों के मुताबिक, स्थानीय भू-माफियाओं ने जमीन पर कब्जा करने के लिए तालाब को मिट्टी से भर दिया है. जब स्थानीय पुलिस जांच के लिए मौके पर पहुंची तो पता चला कि जहां पहले तालाब था, उस समतल जमीन पर भू-माफियाओं ने झोपड़ी बना ली है.

अवैध गतिविधियां

जानकारी के मुताबिक, भूमि पर अवैध तरीकों से अतिक्रमण किया जा रहा था और तालाब को मिट्टी से भर दिया गया था. यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि निवासियों ने कई बार रात के दौरान ट्रकों और मशीनरी की गतिविधियों के बारे में पुलिस को सूचित किया था. घटना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि तालाब उस जमीन का हिस्सा था जो सरकार की थी, जिसका रिकॉर्ड रखा जाता था.

तालाब का नामोनिशान न होने पर भी क्षेत्र में एक झोपड़ी खड़ी कर दी गई है, जिसकी घेराबंदी भी कर दी गई है. हालांकि इस घटना की पहले कई शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन पुलिस आखिरकार उस स्थान पर पहुंच गई जहां तालाब रेत से भरा हुआ था. स्थानीय लोगों के मुताबिक झील में रेत भरने का अवैध काम पिछले कुछ दिनों से चल रहा है.

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि तालाब को भरने के लिए कई मिट्टी हटाने वाली मशीनों और वाहनों का इस्तेमाल किया गया. सूत्रों के मुताबिक इसी इलाके में एक और तालाब भर गया है. पुलिस ने पूछताछ के लिए दो लोगों को हिरासत में लिया है.

जिला जल संकट की चपेट में आ गया है

विशेष रूप से, दरभंगा पानी की कमी से जूझ रहा है, जबकि जिला जल संसाधनों से समृद्ध है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में पीने के पानी की पहुंच भी कम हो गई है. 2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, दरभंगा में 1964 तक 300 से अधिक तालाब थे. जबकि 2020 तक केवल 84 तालाब बचे हैं. बिहार सरकार ने राज्य में जल संरक्षण के लिए जल जीवन हरियाली मिशन शुरू किया है. हालांकि, तालाबों पर भू-माफियाओं का अतिक्रमण सक्रिय रूप से नीतीश के मिशन को विफल कर रहा है.