बाढ़: अपहरण का झूठा नाटक करना पड़ा भारी, पुलिस ने 8 घंटे में किया मामले का उद्भेदन

बाढ़ (TBN – अखिलेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट)| बाढ़ पुलिस ने 8 घंटों के अंदर एक झूठे अपहरण मामले का पर्दाफाश (Barh Police cracked a case of false kidnapping in 8 hours) कर दिया है. इसकी जानकारी बाढ़ अनुमंडल के एएसपी अरविन्द प्रताप सिंह (Barh ASP Arvind Pratap Singh) ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दी.

जानकारी के मुताबिक, बाढ़ अनुमंडल में एक युवक ने अपने ही अपहरण होने की खबर अपने मामा को दी और 20 लाख फिरौती के रूप में मांगी. लेकिन पुलिस ने बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से मामले का पर्दाफाश करते हुए उस युवक को गिरफ्तार कर लिया है.

मामला बाढ़ थाना के गुलाबबाग का है जहां नमामि गंगे प्रोजेक्ट का ठेका कर रहे राजकुमार यादव नामक ठेकेदार का भगीना नीतीश कुमार ने पैसे के लालच में आकर अपने मामा से ही अपने अपहरण की सूचना देते हुए फिरौती की मांग कर डाली.

एएसपी ने मीडिया को बताया कि बुधवार 6 जनवरी को शाम में नीतीश के मामा ठेकेदार राजकुमार ने बाढ़ थाने में अपने भांजे नीतीश के अपहरण की आशंका के संदर्भ में शिकायत दर्ज कारवाई. उसके आधार पर कांड संख्या 11/2022, धारा 365 दर्ज किया गया. उसके बाद बाढ़ और मोकामा के थानाध्यक्ष सक्रिय होते हुए मामले में अपनी जांच शुरू की.

अनुसंधान के क्रम में कथित रूप से अपहृत युवक नीतीश का एक फ़ोटो मिला जिसमें उसके हाथ-पैर बंधे हुए दिखाई दिए. साथ ही युवक के मामा के मोबाईल में दिए गए मेसेज में फिरौती के रूप में पैसे मांगने की बात सामने आई. लेकिन शुरू से ही जांच के क्रम में पुलिस को मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ.

पुलिस को पता लगा कि कथित रूप से अपहृत युवक अपने मामा यानि राजकुमार के घर, अपने ननिहाल में ही रहता था. यहीं रहकर वह काम करता था. अनुसंधान के क्रम में पुलिस ने तकनीकी सबूत (Technical Evidence) संग्रह किये और उसके आधार पर कथित रूप से अपहृत युवक के लोकेशन का पता लगाया.

अनुसंधानकर्ता को पता चला कि कथित रूप से अपहृत उस युवक ने बुधवार सुबह अपनी माशूका को भी कॉल किया था. इस कॉल में उसने अपनी माशूका को अपने लोकेशन के बारे में बताया था. इसी कॉल के आधार पर पुलिस ने नीतीश का पता लगा लिया. बरामदगी के समय पुलिस को नीतीश कुमार के हाथ-पैर बंधे मिले जो उसने खुद लगाए थे.

बाढ़ अनुमंडल के एएसपी अरविन्द प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस को उस युवक की गतिविधि शुरू से ही संदिग्ध लग रही थी. अनुसंधान आगे बढ़ने पर पुलिस का संदेह भी बढ़ता गया. सभी तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस ने इस झूठे अपहरण मामले का पर्दाफाश कर दिया.