करमा पर्व से मजबूत होता है भाई-बहन का प्यार, पढ़ें कर्मा देवता की प्राचीन कथा

Patna (TBN – The Bihar Now डेस्क) | हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को करमा पर्व मनाया जाता है. वहीं आज 29 अगस्त को बिहार और झारखण्ड में करमा का पर्व मनाया जा रहा है. करमा पर्व भाई बहन के स्नेह और प्रेम की निशानी के रूप में मनाया जाता है. बिहार, झारखंड में यह पर्व प्रमुखता से मनाय जाता है. आज से शुरू हुआ ये पर्व अगले 3 दिन तक चलेगा. आज महिलाएं और युवतियां संयत है, कल यानी कि 30 अगस्त को निर्जला उपवास रहेंगी. मुख्य पूजा सबके लिए है. शाम को महिलायें और युवतियां आंगन में करम पौधे की डाली गाड़कर फल, फूल आदि से पूजा करेंगी. आइए जानते हैं करमा और धरमा की पौराणिक कथा.

करमा और धरमा की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा कर्मा और धर्मा नामक दो भाईयों से जुड़ी है. कहा जाता है कि दोनों भाईयों ने अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी जान को दांव पर लगा दिया था. दोनों भाई काफी गरीब थे. उनकी बहन बचपन से ही भगवान से उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती थी. बहन द्वारा किए गए तप के कारण ही दोनों भाईयों के घर में सुख-समृद्धि आई थी. इस एहसान का बदला चुकाने के लिए दोनों भाईयों ने दुश्मनों से अपनी बहन की रक्षा करने के लिए जान तक गंवा दी थी. इस पर्व की परंपरा यहीं से मनाने की शुरुआत हुई थी. इस त्योहार से जुड़ी दोनों भाईयों के संबंध में एक और कहानी है. जिसके मुताबिक एक बार कर्मा परदेस गया और वहीं जाकर व्यापार में रम गया. बहुत दिनों बाद जब वह घर लौटा तो उसने देखा कि उसका छोटा भाई धर्मा करमडाली की पूजा में लीन है. धर्मा ने अपने बड़े भाई के लौट आने पर कोई खुशी जाहिर नहीं की. यहां तक कि वह पूजा में ही तल्लीन रहा. इससे कर्मा क्रोधित हो गया और करमडाली, धूप, नैवेद्य आदि को फेंक दिया और भाई के साथ झगड़ने लगा. मगर धर्मा सबकुछ चुपचाप सहता रहा.

वक्त बीतता गया और कर्मा को देवता का कोपभाजन बनना पड़ा, उसकी सारी सुख-समृद्धि खत्म हो गई. आखिरकार धर्मा को दया आ गई और उसने अपनी बहन के साथ देवता से प्रार्थना किया कि उनके भाई को क्षमा कर दिया जाए. दोनों की प्रार्थना ईश्वर ने सुन ली और एक रात कर्मा को देवता ने स्वप्न देकर करमडाली की पूजा करने को कहा. कर्मा ने ठीक वैसा ही किया और उसकी सारी सुख-समृद्धि वापस आ गई.
(Disclaimer) इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं.

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